मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
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बैठक में विपक्षी दलों के गठबंधन से बन रही जातीय गणित की काट के लिए समग्र हिंदुत्व की किलेबंदी का फॉर्मूला तय हुआ। फैसला किया गया कि पूरा फोकस इस बात पर रहना है कि हिंदुओं के मतों में बहुत विभाजन न होने पाए।
इसके लिए दलितों और पिछड़ों को लामबंद करने के लिए चल रहे अभियानों को सतत जारी रखने के साथ सरकार के स्तर से भी कुछ काम करने की अपेक्षा संघ की तरफ से की गई। सचेत किया गया कि यह काम इस तरह न हो कि सामान्य वर्ग के लोगों को यह लगे कि उनकी चिंता नहीं की जा रही है।
कुछ मंत्रियों और नेताओं की कार्यशैली को लेकर इस बैठक में भी सवाल सामने आए। भाजपा की तरफ से यह भी कहा गया कि अधिकारियों की कार्यशैली से कई जगह कार्यकर्ताओं में हताशा व निराशा है। इसे ठीक करना जरूरी है अन्यथा चुनाव में कठिनाई होगी।
भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री योगी की मंगलवार को दिल्ली की यात्रा और वहां संघ के शीर्ष नेतृत्व के साथ बैठक पूर्व निर्धारित नहीं थी। मुख्यमंत्री सोमवार को जब अयोध्या में साधु-संतों के बीच श्रीराम जन्मभूमि मुद्दे पर उन्हें समझाने की कोशिश कर रहे थे, उसी समय उन्हें दिल्ली पहुंचने का बुलावा मिला।
बुलावे के पीछे अयोध्या सहित हिंदुत्व के एजेंडे से जुड़े अन्य धार्मिक स्थलों के विकास, कुंभ की व्यवस्था, गंगा की निर्मलता और अविरलता, कुछ स्थानों पर संघ की शाखाओं पर अधिकारियों की तरफ से अनावश्यक रोक-टोक, उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा जैसे दलों के गठबंधन से बन रहे समीकरण और चुनाव में हुई घोषणाओं पर काम के साथ एजेंडे से जुड़े स्थलों और मुद्दों पर सरकार के कामों की स्थिति जैसे मुद्दे रहे।
दिल्ली की बैठक में संघ की तरफ से भाजपा के प्रभारी सहसरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल मौजूद रहे। इधर, लखनऊ में दिन भर मनन और मंथन का दौर चला। सुबह निरालानगर में सहसरकार्यवाह होसबोले की उपस्थिति में संघ के सभी प्रमुख संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय, राष्ट्रीय सह महामंत्री संगठन शिवप्रकाश और प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल की बैठक हुई। उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा की मौजूदगी में सभी ने अपनी-अपनी अपेक्षाएं सरकार के सामने रखीं।