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सरकार के कई मंत्रियों से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ नाराज, गिर सकती है गाज

Thu, 26 Apr 2018 01:27 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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संघ प्रमुख मोहन भागवत व सीएम योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala
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एक साल पूरे होने के बावजूद प्रदेश सरकार के कई मंत्रियों की कार्यप्रणाली को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नाराजगी कम नहीं हो पा रही है। संघ से जुड़े संगठनों सहित जिलों और ब्लॉकों में काम कर रहे भाजपा कार्यकर्ताओं की शिकायतें प्रचारकों को लगातार असहज कर रही हैं। इनकी पीड़ा है कि कई मंत्रियों के यहां से आम लोगों की ही नहीं, कार्यकर्ताओं तक की वाजिब समस्याओं का भी समय से समाधान नहीं होता।

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चार-पांच मंत्रियों को छोड़कर ज्यादातर का अपने विभाग के अधिकारियों पर या तो नियंत्रण नहीं है अथवा वे समाधान में रुचि नहीं लेते। कई बार शिकायतों की जांच उसी को सौंप दी जाती है जिस पर आरोप होते हैं। अधिकतर अधिकारियों के फोन अब भी नहीं उठते। संघ की क्षेत्रीय कार्यकारिणी की बुधवार को यहां विश्व संवाद केंद्र पर पूर्वी क्षेत्र के पदाधिकारियों व प्रचारकों की बैठक में ये बातें सामने आईं। संघ की इस नाराजगी का परिणाम कुछ मंत्रियों पर गाज गिरने के रूप में सामने आ सकता है।

संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले की मौजूदगी में हुई बैठक में राष्ट्रीय शारीरिक प्रमुख अनिल ओक, क्षेत्र प्रचारक अनिल, अवध, कानपुर, गोरखपुर और काशी प्रांत के प्रांत कार्यवाह, प्रांत प्रचारक, प्रांत सह कार्यवाह और प्रांत सह प्रचारक भी शामिल थे। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय और प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल भी शामिल हुए।
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प्रचारकों ने कहा कि कार्यकर्ताओं को लगता है कि संघ के पास बात पहुंचाने से समाधान हो जाएगा, पर मुख्यमंत्री और कुछ मंत्रियों को छोड़कर ज्यादातर का हाल ढाक के तीन पात जैसा है। फोन पर या सामने मीठी-मीठी बातें तो कर लेते हैं लेकिन काम नहीं होते। इससे संगठन की साख पर सवाल उठते हैं। शाम को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ उनके सरकारी आवास पर भी बैठक हुई। इसमें दोनों उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और डॉ. दिनेश शर्मा भी मौजूद रहे। इस दौरान अधिकारियों की तैनाती और कार्यकर्ताओं के मनोनयन को लेकर उत्पन्न स्थिति पर भी चर्चा हुई।

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ऐसे कैसे काम चलेगा

- फोटो : amar ujala
संघ के प्रचारकों ने कहा कि मौजूदा स्थिति से भविष्य की चुनौतियां कठिन होती नजर आ रही हैं।  वकीलों की सूची पर उठे विवादों का पूरी तरह समाधान नहीं हो पाया है। हालांकि इधर जारी सूची में अधिकतर कार्यकर्ता हैं लेकिन पहले शिकायतों की सीमा में आए लोग अब भी शामिल हैं। सरकार के कई बार हिदायत देने के बावजूद अधिकारियों का रवैया नहीं सुधर रहा।

समन्वय का रखें ध्यान
सलाह दी गई कि भाजपा को सामाजिक समरसता अभियान चलाने के साथ सावधानी रखनी चाहिए कि पार्टी की छवि किसी की कार्बन कॉपी वाली न बन जाए। संघ प्रारंभ से दलितों और पिछड़ों को सम्मान देने का पक्षधर रहा है, पर यह काम समन्वय से किया जाना चाहिए। सामाजिक समरसता के साथ सावधानी रखी जाए कि पार्टी की छवि किसी जाति विशेष के संरक्षक की न बने। कमजोर वर्गों के लोगों के यहां रात्रि निवास कार्यक्रम अच्छा है, पर सिर्फ रस्म न निभाई जाए।

अपनों को महत्व
भाजपा को सावधान किया गया कि सामाजिक समीकरण संतुलित रखने के लिए अपने मूल काडर के उस समाज से जुड़े व्यक्ति को आगे करें। कई मंत्री जिस तरह अपनी सामाजिक पहचान बनाने के लिए अलग-अलग तरीके से काम करके गुट खड़ा कर रहे हैं, उस पर नियंत्रण जरूरी है।
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