जानकारी के अनुसार, डॉ. आंबेडकर की प्रतिमाओं की तोड़फोड़ और कुछ लोगों की तरफ से दलित और पिछड़े समाज को संघ परिवार से दूर करने की घटनाओं पर भी सरकार का ध्यान खींचा गया। कहा गया कि किसी की भी प्रतिमाएं नहीं टूटनी चाहिए।
ऐसा करने वालों और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो। भाजपा और सरकार की तरफ से बताया गया कि डॉ. आंबेडकर की जयंती 14 अप्रैल से परिनिर्वाण दिवस 6 दिसंबर तक कार्यक्रम तय किए गए हैं। संघ की तरफ से युवाओं की रोजी-रोटी की चिंता करने और नौकरियां देने के सुझाव के साथ अपेक्षा की गई कि संस्कृत और संस्कृति पर सरकार का खास फोकस दिखना चाहिए।
बातचीत के दौरान लोकसभा चुनाव 2019 की चुनौतियां और साख की चिंता प्रमुख रूप से छाई रही। कार्यकर्ताओं का अब तक पर्याप्त संख्या में समायोजन न होने और लोगों की समस्याओं का अपेक्षित समाधान न होने की चिंता से संघ ने फिर दोनों उप मुख्यमंत्रियों को अवगत कराया गया।
सरकारी वकीलों के मनोनयन में सामने आई खामियों के पूरी तरह दूर न होने की भी बात सामने रखी। अधिकारियों की मनमानी का मामला भी उठा। कई जगह के किसानों की नाराजगी का जिक्र करते हुए सचेत किया गया कि किसानों के बचत खाते के पैसे किस कारण से उनके कर्ज में समायोजित कर दिए गए, यह अलग मुद्दा है।
पर, अधिकारियों के इस तरह के कामों से सरकार ही नहीं, पूरे संघ परिवार की साख को चोट पहुंच रही है। स्थानीय स्तर पर समन्वय समितियों को सक्रिय करने, हिंदुत्व के सरोकारों से जुड़े कार्यों पर प्राथमिकता से काम करने पर भी बात हुई।
संघ की तरफ से एक महीने बाद फिर बैठने की बात कहकर तब तक एजेंडे के कामों को पूरा करने के लिए सचेत किया गया। बैठक में संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले, डॉ. कृष्णगोपाल, क्षेत्र प्रचारक अनिल, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और डॉ. दिनेश शर्मा ने हिस्सा लिया।