हर ऑपरेशन के वक्त वह एक्सपर्ट के तौर पर ऑपरेशन थियेटर में मौजूद रहेंगे। अभी इंडोक्राइन सर्जरी, गैस्ट्रो सर्जरी, यूरोलॉजी और कार्डियोलॉजी, सीटीवीएस विभाग से संबंधित मरीजों की सर्जरी की जाएगी। फिलहाल निदेशक प्रोफेसर राकेश कपूर, सीएमएस प्रोफेसर अमित अग्रवाल सहित आठ चिकित्सक रोबोटिक सर्जरी का प्रशिक्षण ले चुके हैं।
अगले चरण में कुछ अन्य चिकित्सकों को भी प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा। एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो. राकेश कपूर कहते हैं कि इससे जटिल सर्जरी आसान हो जाएगी। खून कम निकलेगा और संक्रमण का खतरा न के बराबर रहेगा।
सीएमएस प्रोफेसर अमित अग्रवाल ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी का उपयोग प्रोस्टेट कैंसर और थायराइड ग्रंथि से जुड़ी सर्जरी में खासतौर से होता है। इसकी सफलता दर शत प्रतिशत रही है। यहां भी इन मरीजों को वरीयता दी जाएगी।
रोबोटिक सर्जरी के जरिए रेक्टर कैंसर के केस में आंत को जोड़ने, बड़ी आंत से संबंधित ऑपरेशन, गुर्दा रिमूवल, हार्ट के वॉल्व, लंग सर्जरी, पाइलोप्लास्टी सर्जरी में खासतौर से किया जाता है। ये ऑपरेशन काफी जटिल और बारीक माने जाते हैं। किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट के वक्त भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
खर्च थोड़ा ज्यादा
- ओपेन सर्जरी : 40 से 50 हजार रुपये
- लेप्रोस्कोपिक सर्जरी : 80 से 90 हजार रुपये
- रोबोटिक सर्जरी : करीब 1 से डेढ़ लाख
जर्मन में बनी दा विंची रोबोट मशीन में हाई डेफिनिशन थ्री-डी कैमरा लगा होता है। ऑपरेशन टेबल पर मरीज को लेटाना के बाद संबंधित स्थान पर मशीन फिट की जाती है। जिस अंग का ऑपरेशन करना होता है, वहां पर तीन छेद करके थ्री-डी हाई डेफिनिशन विजुअल सिस्टम से छोटे उपकरण शरीर में प्रवेश कराए जाते हैं।
इसके बाद कंसोल पर बैठ सर्जन निर्देश देना शुरू करते हैं और मशीन उसी आधार पर सर्जरी करती है। इसी कंसोल पर ही कंप्यूटराइज्ड सिस्टम से कंट्रोल होता है। एक रोबोट मशीन एक मिमी के भी गैप में सटीकता के साथ काम कर सकता है, जबकि एक डॉक्टर की सीमा 10 मिमी. तक ही होती है।