शहरों में छोटा-मोटा रोजगार करके जीवन यापन करने वालों को अब खुले आसमान
के नीचे गुजर बसर नहीं करना पड़ेगा।
ऐसे लोगों को शहर में ही मुफ्त में
आश्रय उपलब्ध कराए जाएंगे। इसमें एक व्यक्ति को रहने के लिए पांच वर्ग मीटर
का स्थान दिया जाएगा। जिस पर वह रहने के साथ खाना भी बना सकेगा। इसमें
मनोरंजन की भी सुविधा होगी।
आश्रय स्थल के आसपास आंगनबाड़ी केंद्र व
प्राथमिक स्वास्थ्य भी होंगे। यह सुविधा राष्ट्रीय शहरी जीविका मिशन योजना
के तहत लोगों को उपलब्ध कराई जाएगी।
केंद्र
सरकार स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना को 31 मार्च 2014 से बंद करने जा रही
है। इसमें जितनी भी योजनाएं चल रही हैं वे सभी राष्ट्रीय शहरी जीविका मिशन
में शामिल हो जाएंगी।
इसमें शहरी क्षेत्रों में रोजगार करने वालों को
आश्रय मुहैया कराने की योजना शामिल की जा रही है। इसका मुख्य मकसद शहरों
में रोजगार करने वालों को पक्का आश्रय उपलब्ध कराना है।
एक लाख से अधिक
आबादी वाले शहरों में एक स्थल पर 50 से 100 लोगों के लिए आश्रय का निर्माण
कराया जाएगा।
इसके लिए जिला प्रशासन और निकाय जमीन उपलब्ध कराएंगे। इसके
निर्माण पर आने वाले कुल खर्च का 75 प्रतिशत केंद्र देगा और 25 फीसदी राज्य
सरकार को वहन करना होगा।
राष्ट्रीय शहरी
जीविका मिशन योजना में पुराने आश्रय भवनों का जीर्णोद्धार कराने के साथ ही
उसकी क्षमता बढ़ाई जाएगी। केंद्र से मिलने वाले पैसे से इसका निर्माण
निकायों को कराना होगा। निकाय स्वयं इसकी देखरेख करेंगे।
वे चाहेंगे तो
निजी सेक्टर, स्वयंसेवी संस्था, चैरिटबल संस्थान या ट्रस्ट के माध्यम से भी
इसकी देखभाल करा सकेंगे।
प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों के साथ एक लाख से
अधिक आबादी वाले सात कस्बों में भी इसका निर्माण किया जाएगा। राज्य स्तर पर
इसकी देखरेख की जिम्मेदारी नगरीय विकास अभिकरण (सूडा) की होगी।