सबसे बड़ा फायदा फ्लाईओवर पर यह है कि पहले की तुलना में एक तिहाई तक परत की मोटाई कम हो जाती है। इससे स्टील ज्वाइंट को सुरक्षित रखना आसान होता है। सड़क की उम्र भी अधिक होगी। माल एवेन्यू फ्लाईओवर पर पैचवर्क लगातार कराना पड़ता था।
अब यहां काफी समय से पैचवर्क या सडक की टॉपलेयर बनाने का काम हमें नहीं करना पड़ा है। दोनों ही फ्लाईओवर पर ट्रैफिक भी सुगमता से चल रहा है। इन सड़कों पर वाहनों को भी स्मूथ ड्राइव मिल रही है।
पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता राजीव राय का कहना है कि माइक्रो सर्फेसिंग का सबसे बड़ा फायदा यह है कि पानी का असर नहीं होता है। पानी बिटुमिन की सड़कों के लिए दुश्मन माना जाता है। शहर में जलभराव की समस्या बहुत अधिक है।
ऐसे में सड़कें भी जल्दी खराब हो जाती हैं। इमल्सन पर पानी का असर नहीं होता। इससे सड़क अधिक समय तक चलेगी। कैसरबाग में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में भी इसी तकनीक से सड़क बनाने की योजना है।
मानस श्रीवास्तव का कहना है कि न्यूनतम साइज की गिट्टी का उपयोग बिटुमिन की जगह इमल्सन के साथ करके टॉप लेयर बनाई जाती है। नीचे की लेयर में कोई बदलाव नहीं किया जाता है। इससे टॉप लेयर पर कम मोटाई के बाद भी पकड़ व मजबूती बढ़ती है।
फ्लाईओवर के ऊपर की सड़क बनाने में इसका अधिक उपयोग है। यहां सड़क की मोटी लेयर बनाने से उसका स्ट्रक्चर डिजाइन ही बदल जाने का खतरा रहता है। लखनऊ में ही कई जगह पुलों और फ्लाईओवर के ऊपर देखने को मिल जाएगा कि एक्सपेंशन ज्वाइंट या तो दब गए या उनके गड्ढानुमा हो गए। इससे फ्लाईओवर की लाइफ भी घटती है।