नदी और नालों के करीब अब निर्माण नहीं हो सकेंगे। यही नहीं, इनके किनारे जो भी निर्माण हुए हैं, उन्हें विशेष अभियान चलाकर हटाया जाएगा।
नदी व नालों के बहाव क्षेत्र के संरक्षण के लिए बंधा बनाने का प्रस्ताव महायोजना में चिह्नित किया जाएगा। प्रमुख सचिव आवास सदाकांत ने आवास नीति के अनुसार पर्यावरण संरक्षण का शासनादेश जारी कर दिया है।
शासनादेश के मुताबिक नदी के करीबी क्षेत्रों को संवेदनशील घोषित किया जाएगा। शहरी क्षेत्रों के विस्तार के चलते नदी के किनारों को पाटा जा रहा है।
इससे पानी के बहाव वाले स्थल में कमी आ रही है। इसलिए नदियों के किनारे ऐसे स्थलों को संवेदनशील घोषित करते हुए इसकी सीमा के बाहर ही विकास व निर्माण की अनुमति दी जाएगी।
संवेदनशील क्षेत्रों में जमीन मालिकों को खेती, बागवानी, फ्लोरीकल्चर, पौधरोपण के अलावा पर्व, स्नान, सार्वजनिक समारोह के लिए अस्थाई अनुमति ही दी जाएगी।
ऐसे स्थलों को निजी संस्थाओं को नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा गंगा, यमुना, गोमती, राप्ती, रामगंगा, हिंडन, बेतवा, घाघरा आदि के किनारे बसे नगरों का सीवेज, प्रदूषित जल तथा औद्योगिक कचरे को नालों से जाने पर रोक लगाई जाएगी।
नदियों में गिरने वाले नालों का डायवर्जन किया जाएगा। सिंचाई विभाग नदियों की सफाई की योजना बनाते हुए इसके किनारों को ऐतिहासिक व सांस्कृतिक धरोहर से संबंधित भवनों, परिसरों आदि के लिए तैयार करेगा।