मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने और विषमुक्त खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने गंगा के दोनों तटों पर 05-05 किलोमीटर तक प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं। प्रदेश में 27 जनपद गंगा से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा बुंदेलखंड के 07 जिलों में प्राकृतिक खेती के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया है। वर्तमान में लगभग 85 हजार हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती हो रही है। इस बार यहां उत्पादन अच्छा हुआ है। जीरो बजट वाली इस खेती के अच्छे परिणामों के तुलनात्मक रिपोर्ट के साथ किसानों को जागरूक किया जाए। राज्य स्तरीय प्राकृतिक कृषि बोर्ड का गठन भी किया गया है। प्राकृतिक खेती के अभियान से अधिकधिक किसानों को जोड़ा जाना चाहिए।
अब तक प्रदेश में 66,180 हेक्टेयर क्षेत्र को जैविक खेती तहत लाया गया है। एक लाख से अधिक किसान जैविक खेती से लाभान्वित हो रहे हैं। सभी किसानों को भारत सरकार के जैविक खेती पोर्टल से जोड़ा जाए। जैविक उत्पादों की पहचान करने और गुणवत्ता सुनिश्चित के लिए सभी मंडल मुख्यालयों पर प्रयोगशाला की स्थापना की जाए। इसी प्रकार सभी कृषि मंडियों में जैविक उत्पाद के आउटलेट भी स्थापित किए जाएं।
मां गंगा का हर घाट पवित्र है। इसके किनारे अनेक तीर्थ क्षेत्र, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थल और असीम प्राकृतिक सुंदरता है। हमें इन क्षेत्रों में पर्यटन की नवीन संभावनाओं को बढ़ावा देना चाहिए। यहां एडवेंचर टूरिज्म, वॉटर स्पोर्ट टूरिज्म की अपार संभावना है। प्रधानमंत्री जी के प्रयासों से इस दिशा में वाराणसी में प्रेरक प्रयास हुआ है। हमें रिवर क्रूज टूरिज्म, वॉटर स्पोर्ट/कैम्पिंग सुविधाओं के साथ वन्य जीव पर्यटन के मॉडल को विकसित करना चाहिए।
महिला स्वयं सहायता समूहों, भूतपूर्व सैनिकों आदि के सहयोग से गंगा नर्सरी विकसित करने के प्रयास किये जाएं। यहां हमें नर्सरी से लेकर फलों के प्रसंस्करण बाकी पूरी वैल्यू चेन बनानी चाहिए। यह 'गंगा उत्पाद' गंगा किनारे के लोगों के लिए आय के स्थायी साधन बन सकते हैं।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 'नदी शहरों के लिए नई सोच' की आवश्यकता बताई है। नमामी गंगे के अनुभवों से सीख लेते हुए नदी किनारे बसे शहरों की योजना बनाने में नई नदी केंद्रित सोच की जरूरत है। यह शहर के मास्टर प्लान का हिस्सा होना चाहिए।आईआईटी कानपुर के तकनीकी सहयोग से इस सम्बंध में आवश्यक कार्यवाही की जाए।
नदी संस्कृति के प्रति व्यापक जागरूकता बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। जल संरक्षण, नदियों की स्वच्छता, नदी पुनर्जीवन, स्वच्छता के अभियान से बच्चों को भी जोड़ा जाना चाहिए। माध्यमिक कक्षाओं के पाठ्यक्रम में इस विषय को शामिल किया जाए। युवक मंगल दल/महिला मंगल दल के माध्यम समाज को जागरूक करने के प्रयास हों।
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में वर्ष 2019 में राष्ट्रीय गंगा परिषद की प्रथम बैठक कानपुर में सम्पन्न हुई थी। अब आगामी 30 दिसम्बर को द्वितीय राष्ट्रीय गंगा परिषद की बैठक प्रस्तावित है। तदनुरूप आवश्यक तैयारी समय से पूरी कर ली जाए।