लखनऊ। केजीएमयू में गरीब मरीजों के लिए संचालित निशुल्क इलाज योजनाओं में कथित अनियमितताओं की जांच दो महीने से अभिलेखों के इंतजार में अटकी है। शासन से एसआईटी गठित करने के बावजूद जांच समिति को जरूरी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए गए। इस पर चिकित्सा शिक्षा विभाग ने नाराजगी जताते हुए केजीएमयू प्रशासन को तत्काल सभी अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
चिकित्सा शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव आनंद कुमार त्रिपाठी ने एक अक्तूबर को केजीएमयू कुलसचिव को पत्र भेजकर जांच समिति को संस्थान स्तर पर उपलब्ध सभी दस्तावेज तत्काल देने को कहा है।
महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण के 23 सितंबर के पत्र के मुताबिक, एचआरएफ, मुख्यमंत्री राहत कोष, आयुष्मान भारत, जन सुरक्षा, दीनदयाल उपाध्याय, असाध्य रोग योजना और आरबीएसके समेत अन्य योजनाओं में अनियमितताओं की शिकायतों की जांच हो रही है। शासन के 22 जुलाई के आदेश पर डीजीएमई की अध्यक्षता में विशेष जांच दल गठित किया गया था।
17 सितंबर को डीजीएमई ने वित्त नियंत्रक और अकाउंट अधिकारी एसएन मौर्य को 21 सितंबर तक रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन अभिलेख नहीं मिले। अब शासन ने संस्थान और जरूरत पड़ने पर शिकायतकर्ता से भी रिकॉर्ड लेकर एसआईटी को देने को कहा है। केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि सभी दस्तावेज एक-दो दिन में एसआईटी को उपलब्ध करा दिए जाएंगे, ताकि जांच प्रभावित न हो।