ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित राजकीय एवं सहायता प्राप्त स्कूलों में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। वहां शिक्षकों के पद बड़ी संख्या में रिक्त हैं और सेवानिवृत्त शिक्षक भी गांवों में जाना नहीं चाहते हैं। जिला विद्यालय निरीक्षकों ने सेवानिवृत्त शिक्षकों से व्यक्तिगत संपर्क कर ग्रामीण स्कूलों में शिक्षण कार्य का आग्रह किया, लेकिन खास सफलता हाथ नहीं लगी है।
बोर्ड से चयनित अभ्यर्थी भी नहीं आए
माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने 1 अप्रैल 2017 से अक्तूबर 2019 तक 6167 सहायक अध्यापकों का चयन किया है। इसमें से 4927 ने सहायता प्राप्त स्कूलों में कार्यभार ग्रहण किया जबकि 1205 ने कार्यभार ग्रहण नहीं किया।
वैकल्पिक व्यवस्था के लिए बीएड के विद्यार्थियों को स्कूलों में लगाया जा रहा है। जल्द ही चयन बोर्ड व लोक सेवा आयोग से नए चयनित शिक्षक मिल जाएंगे। इससे शिक्षण व्यवस्था में और सुधार होगा।
- डॉ. दिनेश शर्मा, उप मुख्यमंत्री