फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राजनीति व ब्यूरोक्रेसी नहीं चाहती कि पुलिस सुधार हों: रिटायर्ड आईपीएस

Fri, 10 Jun 2016 02:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी प्रकाश सिंह - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
सूबे के पुलिस महानिदेशक रहे सेवानिवृत्त आईपीएस अफसर प्रकाश सिंह कहते हैं कि राज्य सरकारें अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए पुलिस रिफॉर्म्स नहीं होने देना चाहती हैं। ब्यूरोक्रेसी भी पुलिस पर घुड़सवारी करना चाहती है।
विज्ञापन


मथुरा के जवाहरबाग कांड में दो पुलिस अफसरों की शहादत के बाद एक बार फिर पुलिस सुधारों पर बहस शुरू हो गई है। इस मसले पर गुरुवार को ‘अमर उजाला’ से बातचीत में बीएसएफ और असम पुलिस के भी चीफ रहे प्रकाश सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2006 में पुलिस सुधारों के लिए कई दिशा-निर्देश दिए थे, लेकिन इनका पालन नहीं हुआ।

पुलिस को अपने काबू में रखना भी एक नशा जैसा है। राज्य सरकारें इसे किसी भी हालत में छोड़ने को तैयार नहीं हैं। वे पुलिस का इस्तेमाल अपने हिसाब से करती हैं।
विज्ञापन


अपने लोग यदि किसी मामले में फंस जाते हैं तो सत्ताधारी दल उसे छुड़ाने के लिए दबाव बनाते हैं। यदि विरोधी लोग हैं तो उन्हें फंसाने के लिए पुलिस पर दबाव बनाया जाता है।

'पुलिस से काम लेती हैं, पर संसाधन नहीं देना चाहतीं सरकारें'

- फोटो : amar ujala
सरकारें पुलिस से हर काम तो लेती हैं, लेकिन संसाधन व सुविधाएं नहीं देना चाहतीं। देश की प्रगति व जनता के हितों से इनका कोई लेना-देना नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को लागू करवाने को लेकर केंद्र सरकार भी उदासीन है। यदि केंद्र सजग हो जाए तो पुलिस रिफॉर्म की दिशा में काफी काम हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट की आंखों में धूल झोंक रहे
सरकारें पुलिस सुधार के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को लागू करना ही नहीं चाहती हैं। इसलिए वे सुप्रीम कोर्ट की आंखों में धूल झोंक रही हैं। कागजों पर ही निर्देशों को लागू कर दिया जाता है। यही रिपोर्ट कोर्ट में भेज दी जाती है।

कृपापात्र डीजीपी तो सरकार के इशारों पर ही करेंगे काम
सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे लोगों को डीजीपी बनाने की बात कही थी जिनका न्यूनतम दो साल का कार्यकाल हो, लेकिन यूपी में इन निर्देशों की सर्वाधिक अवहेलना हुई। यहां कुछ महीनों के लिए भी डीजीपी नियुक्त किए गए। जब ऐसे डीजीपी बनाए जाएंगे तो वे सरकार के इशारों पर ही काम करेंगे।
विज्ञापन

सुधार की बातें कागजी होती हैं...

- फोटो : amar ujala
प्रकाश सिंह कहते हैं कि कुछ लड़ाइयां बहुत लंबी चलती हैं। पुलिस रिफॉर्म्स की लड़ाई भी ऐसी ही है। इस देश में दो सबसे पावरफुल संस्थाएं हैं-ब्यूरोक्रेसी और राजनीतिक दल। दोनों ही इसका विरोध कर रही हैं। वे चाहती हैं कि यथास्थिति बनी रहे। सुप्रीम कोर्ट के सामने दिखाया जाता है कि हम कुछ कर रहे हैं। इसलिए सुधार की कागजी बातें होती हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने ये दिए थे दिशा-निर्देश
- प्रत्येक राज्य में स्टेट सिक्योरिटी कमीशन का गठन।

- पुलिस महानिदेशक की मेरिट के आधार पर नियुक्ति, उनका कार्यकाल कम से कम दो वर्ष हो।

- एसएसपी व थाना इंचार्ज का कार्यकाल कम से कम दो वर्ष हो।
आपराधिक जांच और अभियोजन के कार्यों के लिए अलग-अलग पुलिस की व्यवस्था।

- पुलिस एस्टेब्लिशमेंट बोर्ड का गठन, जो पुलिस अफसरों की ट्रांसफर-पोस्टिंग, प्रमोशन व सर्विस संबंधी अन्य मामलों को देखेगा।

- पुलिस शिकायत निवारण प्राधिकरण का गठन।

- केंद्र स्तर पर नेशनल सिक्योरिटी कमीशन का गठन।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें