सांसदों के टिकट काटकर जीत की रणनीति
इस चुनाव में भाजपा के रणनीतिकारों ने हार की हर आशंका को चिह्नित किया। जरूरत पड़ी तो कई मौजूदा सांसदों का टिकट काटने में भी संकोच नहीं किया। कई वरिष्ठ सांसदों समेत कुल 17 सांसदों का टिकट काटकर भाजपा ने उनकी सीटों पर जीत पक्की करने के लिए रणनीति बनाई। इसलिए इन सांसदों की सीट पर हार-जीत के नतीजे के आधार पर भाजपा की उस रणनीति की भी परीक्षा होगी।
यादव वोट बैंक साधने पर रहा फोकस
इस बार के चुनाव में भाजपा ने अपने कोटे की 75 सीटों पर भले ही सिर्फ आजमगढ़ में यादव चेहरा उतारा हो, लेकिन सपा के काडर वोटबैंक माने जाने वाले यादव समाज को अपने पाले में लाने की पूरी कोशिश की। इसके लिए भाजपा ने न केवल इस बिरादरी के मोहन यादव को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठाया, बल्कि शपथ लेने के साथ ही मोहन यादव को यूपी के मैदान पर भी उतारकर यादव बिरादरी को साधने की रणनीति पर काम किया। वहीं, मुलायम सिंह के करीबी पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह यादव समेत सपा के कई नेताओं को भी भाजपा में शामिल कराया गया। इस रणनीति का कितना असर रहा, इसकी परख भी चुनाव परिणामों से होगी।
लोकसभा क्लस्टर की भी होगी परख
भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने इस बार प्रदेश में चार लोकसभा क्षेत्रों को मिलाकर क्लस्टर बनाए। प्रदेश में कुल 20 क्लस्टर बनाए गए। इनके जरिये हर मतदाता तक पहुंचने की रणनीति पर काम किया गया।
क्लस्टर के जरिये घर-घर मतदाता पर्ची पहुंचाना, मोदी पत्र का वितरण, परिवार पर्ची का वितरण, पन्ना प्रमुखों की निगरानी जैसे संगठन के 20 प्रमुख कामों पर फोकस किया गया।
स्मार्ट फोन रखने वाले सभी मतदाताओं की बूथवार सूची तैयार की गई। सूची में शामिल मतदाताओं को केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी देने के लिए दो लाख व्हाट्सएप ग्रुप तैयार किए गए।
छह महीने पहले से ही लाभार्थी वर्ग को साधने की शुरू कर दी थीं कोशिशें
केंद्र और प्रदेश की जन कल्याणकारी योजनाओं के सभी लाभार्थियों को एक वर्ग मानते हुए हर लाभार्थी तक पहुंचने की भी खूब कोशिशें हुईं। चुनाव शुरू होने के छह महीने से पहले से ही उनसे संपर्क करने के लिए बूथवार संपर्क अभियान चलाया गया।