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यूपी में नहीं बिकेगी मैगी, जारी रहेगा प्रतिबंध

Wed, 11 Nov 2015 01:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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नौनिहालों की सेहत पर खतरा बनने के बाद प्रदेश में मैगी की बिक्री पर प्रतिबंध फिलहाल जारी रहेगा। खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन ने साफ किया है कि केंद्रीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसए) द्वारा मैगी की बिक्री व भंडारण पर लगे प्रतिबंध को हटाने संबंधी लिखित आदेश मिलने के बाद ही प्रदेश में मैगी की बिक्री पुन: शुरू करने की अनुमति एफएसडीए स्तर से दी जाएगी।
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एफएसडीए के अपर आयुक्त (प्रशासन) राम अरज मौर्या ने बताया कि फिलहाल मैगी उत्पाद से जुड़ी कंपनी नेस्ले इंडिया मुंबई हाईकोर्ट के आदेश के आधार पर मैगी की बिक्री शुरू करने की बात कह रही है।

इस संबंध में एफएसडीए प्रशासन को अभी तक केंद्रीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण से प्रतिबंध हटाने का कोई निर्देश नहीं मिला है। इसलिए प्रदेश में मैगी को अभी बिकने नहीं दिया जाएगा।
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मालूम हो कि मई 2015 में विभिन्न राज्यों में नमूनों की जांच में फेल रिपोर्ट आने के बाद एफएसएसए ने नेस्ले इंडिया  के मैगी से जुड़े नौ उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था।
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सेहत से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्‍त कार्रवाई

प्रदेश में भी मिलावटी खाद्य सामग्री की रोकथाम से जुड़े खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने मैगी की बिक्री को प्रतिबंधित कर इसका स्टॉक बाजार से हटा दिया था। एफएसडीए के अपर आयुक्त ने बताया कि प्रदेश सरकार सेहत से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ  सख्त कार्रवाई करेगी।

हानिकारक तत्वों (मोनोसोडियम ग्लूकामेड) से बचाव के पूरे इत्मीनान के बाद ही प्रदेश में मैगी की बिक्री शुरू करने की अनुमति दी जाएगी। अगर कहीं भी इसे बेचने की जानकारी मिली तो एक्ट के प्रावधानों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

बाराबंकी में नमूने की जांच के बाद लगा था प्रतिबंध
एफएसडीए की बाराबंकी जिला इकाई द्वारा अप्रैल 2015 में कराई गई नमूना जांच असुरक्षित श्रेणी पाई गई। इसके बाद ही मैगी की बिक्री बंद कराने को देशव्यापी स्तर पर इतनी बड़ी कार्रवाई हुई थी।

रिपोर्ट में मैगी में सेहत के लिए घातक व जानलेवा लेड की मात्रा तय मानक 2.7 पार्ट्स से सात-आठ गुना अधिक 17.2 पाई गई थी। जांच में एमसीजी (मोनोसोडियम ग्लूकामेड) भी बिना वैधानिक चेतावनी के पाया गया था।
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