दूसरे दिन भी डीआरपी रेजिडेंट गायब रहे।
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लखनऊ स्थित बलरामपुर अस्पताल में डिस्ट्रिक्ट रेजीडेंसी प्रोग्राम (डीआरपी) के तहत तैनात रेजीडेंट डॉक्टरों की मनमानी जारी है। 7 मई को दूसरे दिन पहली पॉली में रेजीडेंट डॉक्टर ड्यूटी से गायब रहे। मात्र एक मेडिकल अफसर (ईएमओ) व इंटर्न के भरोसे इमरजेंसी ओपीडी का संचालन हुआ। इससे मरीजों के इलाज और भर्ती में अड़चन आई। अस्पताल प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। आपात बैठक कर गैरहाजिर रहने वाले रेजीडेंट डॉक्टरों को नोटिस जारी किया है।
इमरजेंसी में मरीजों को त्वरित और बेहतर इलाज मुहैया कराने के लिए डीआरपी रेजीडेंट की तैनाती की गई है। ये डॉक्टर पीजी की पढ़ाई के साथ सेवाएं देते हैं। इमरजेंसी की हर पाली में दो रेजीडेंट की तैनाती की व्यवस्था है, लेकिन रेजीडेंट डॉक्टर ड्यूटी नहीं कर रहे। 5 मई की दोपहर 12 बजे मेडिकल अफसर व दो इंटर्न ने इमरजेंसी ओपीडी संभाली, जबकि रेजीडेंट ड्यूटी से गायब रहे। जानकारी पर अस्पताल निदेशक ने आनन-फानन में बैठक बुलाई। सभी विभागों के अध्यक्षों के साथ मीटिंग के बाद पत्र जारी किया कि कोई अनुपस्थित होता है, तो संबंधित मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को ऐसे डॉक्टरों की गैरहाजरी की रिपोर्ट अनिवार्य रूप से भेजी जाए।
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इमरजेंसी में मरीजों का दबाव
बलरामपुर अस्पताल की इरमजेंसी में 140 से अधिक बेड हैं। 24 घंटे में औसत 120 से अधिक मरीज भर्ती किए जाते हैं। इससे यहां हमेशा मरीजों का दबाव रहता है। अस्पताल के निदेशक डॉ. दिनेश कुमार ने बताया कि शिकायत मिली थी कि इमरजेंसी में कई डीआरपी वाले डॉक्टर ड्यूटी नहीं करते हैं। गैरहाजिर रहने वालों को नोटिस दिया गया है। यह भी नियम बना है कि जानकारी दिए बिना ड्यूटी से गायब रहने वाले को अनुपस्थित मानकर उसकी रिपोर्ट संबंधित मेडिकल कॉलेज को भेजी जाएगी।