किशोरी को बलरामपुर में भर्ती किया गया।
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15 साल की किशोरी दो दिन तक लोहिया संस्थान की इमरजेंसी में भर्ती रही, लेकिन उसे इलाज नहीं मिला। परिजनों ने इसके लिए गुहार लगाई तो डॉक्टर ने मरीज को बाहर करने की धमकी दे दी। परेशान घरवाले जान बचाने के लिए बेटी को मंगलवार को निजी अस्पताल ले गए। वहां से बलरामपुर अस्पताल भेज दिया गया। यहां भी दबाव बनाने के बाद किशोरी को भर्ती किया गया।
बाराबंकी जिले के फतेहपुर स्थित बेलहरा निवासी 15 वर्षीय माया देवी को एक हफ्ते पहले पेट में दर्द व जलन की समस्या हुई। पिता संतराम ने उसे पास के डॉक्टर को दिखाया, पर फायदा नहीं हुआ। माया को सांस लेने में तकलीफ होने लगी तो फतेहपुर के अस्पताल में दिखाया। यहां से बाराबंकी के जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। परिजन वहां पहुंचे तो डॉक्टरों ने हालत गंभीर बताते हुए लोहिया संस्थान भेज दिया।
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संतराम ने बताया कि रविवार चार मई को उन्होंने बेटी को लोहिया संस्थान की इमरजेंसी में भर्ती कराया। यहां उसे ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया। संतराम का आरोप है कि दो दिन तक माया को एक इंजेक्शन तक नहीं लगाया गया। हालत गंभीर होने पर जब डॉक्टर से इलाज करने के लिए कहा तो इमरजेंसी से मरीज को बाहर करने की धमकी दी गई।
बेबस संतराम मंगलवार को बेटी को कुर्सी रोड के निजी अस्पताल ले गए। यहां से उसे बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी रेफर कर दिया गया। दोपहर को घरवाले माया को लेकर इमरजेंसी पहुंचे। पहले तो डॉक्टरों ने भर्ती करने में आनाकानी की। परिजनों ने दबाव बनाया तो माया को भर्ती किया गया। लोहिया संस्थान के प्रवक्ता डॉ. भुवन तिवारी ने बताया कि मामले की कोई जानकारी नहीं है। तीमारदार शिकायत करते हैं तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।