भूपेन्द्र सिंह चौधरी ने बताया कि वर्ष 2020-21 में प्रदेश की 58756 से अधिक ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया, जिसके सापेक्ष 43,830 सामुदायिक शौचालयों का निर्माण पूर्ण कराया गया है। इनमें एक करोड़ से अधिक मानव दिवस का सृजन राजगीरों एवं श्रमिकों के लिए किया गया है। इनके निर्माण पर 2200 करोड़ रुपये खर्च आया है।
1052 पंचायत भवनों, 8 डीपीआरसी का निर्माण पूरा
पंचायतीराज मंत्री ने बताया कि प्रदेश के 75 जिलों में 2498 पंचायत भवनों के निर्माण के लिए 318.14 करोड़ रुपये रिलीज किए गए। प्रत्येक पंचायत भवन के लिए 17.46 लाख रुपये स्वीकृत किए गए। इनमें से 1052 पंचायत भवनों का निर्माण पूरा कर लिया गया और 1446 निर्माणाधीन हैं। 25 जिलों में 50 करोड़ की लागत से जिला पंचायत रिसोर्स सेंटर (डीपीआरसी) की स्थापना की जा रही है। 8 डीपीआरसी का निर्माण पूरा कर लिया गया है। पांच लाख रुपये प्रति सेंटर की लागत से 26 पंचायत लर्निंग सेंटर की स्थापना की गई है। ग्राम पंचायतों को डिजिटली सशक्त करने के लिए 3145 लैपटॉप दिए जाने की कार्रवाई चल रही है।
चौधरी ने बताया कि पिछले 4 वर्षों में 848 के लक्ष्य के सापेक्ष 718 अन्त्येष्टि स्थलों का निर्माण कार्य पूर्ण किया गया है। प्रत्येक स्थल की लागत 24.36 लाख है। मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार योजना के तहत प्रदेश सरकार ने 3 वर्षों में 724 ग्राम पंचायतों को 36.87 करोड़ की पुरस्कार धनराशि उपलब्ध कराई गई है। राष्ट्रीय स्तर के पंचायत सशक्तीकरण पुरस्कारों में विगत 4 वर्षों में 6 जिला पंचायतों, 12 क्षेत्र पंचायतों एवं 87 ग्राम पंचायतों को उत्कृष्ट कार्यों के लिए पुरस्कृत किया गया है। उन्होंने बताया कि पीएफएमएस व्यवस्था लागू करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है।