मच्छरों के डंक में बढ़ रही है ताकत
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क्या हो अगर डेंगू, मलेरिया, दिमागी बुखार, चिकनगुनिया जैसी घातक बीमारियों के वाहक मच्छरों पर मॉस्किटो रेपलेंट, स्प्रे आदि का असर ही न हो। यह आशंका आने वाले दिनों में सही साबित हो सकती है। साइंस जर्नल अडवांसेज में छपी एक हालिया रिसर्च के मुताबिक भारत समेत एशिया के कई देशों में कीटनाशकों का छिड़काव मच्छरों को मारने की जगह उनमें प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर उन्हें और ताकतवर बना रहा है। डेंगू व मलेरिया जैसे रोग फैलाने वाले एडीज एजिप्टी, एनाफिलीज आदि मच्छरों में इन सभी कीटनाशकों के खिलाफ मजबूत प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो गई है। ऐसे में सतर्कता ही बचाव है। चिकित्सकों का कहना है कि घरों में मच्छरदानियों का इस्तेमाल करें व मच्छरों को पैदा होने से रोका जाए।
मच्छरों में मिले म्यूटेशन
विभिन्न जर्नल में छपी रिपोर्ट के मुताबिक वैज्ञानिकों ने एशिया के कई देशों में मच्छरों पर शोध किया है। उनकी टीम को मच्छरों में कई ऐसे म्यूटेशन मिले, जिनके कारण पाइरेथ्रिन, प्रालेथ्रिन, मैलाथियान, इटोफेनप्राक्स, पाइरेथ्रॉइड, साइफेमेथ्रिन, टेमीफास जैसे प्रचलित रसायनों का मच्छरों पर बेहद कम असर हो रहा है। रिसर्च टीम को मच्छरों की कुछ ऐसी नस्लें मिलीं, जिनमें कीटनाशकों के प्रति संवेदनशीलता बहुत कम व प्रतिरोधक क्षमता कई गुना ज्यादा पाई गई है।
जेनेटिक इंजीनियरिंग है उपाय:
कुछ साल पहले इंपीरियल कॉलेज लंदन में प्रो ऑस्टिन बर्ट ने जीन-ड्राइव तकनीक विकसित की है। इसके प्रयोग से मच्छरों के कुछ जीन में परिवर्तन करके इनकी आबादी पर नियंत्रण पाया जा सकता है। इस तकनीक के तहत एक खास किस्म के प्रोटीन की मदद से मच्छरों के डीएनए में बदलाव कर एक विशेष आनुवंशिक अनुक्रम जोड़कर मच्छरों की प्रजनन क्षमता को ही प्रभावित कर दिया जाता है। इससे मच्छर बीमारी फैलाने में असमर्थ हो जाते हैं और मच्छरों का जीवनकाल भी कम हो गया। इससे मलेरिया परजीवी व डेंगू पर प्रभावी रोकथाम में मदद मिली।
समय पर इलाज जरूरी
डेंगू से संक्रमित होने पर तेज बुखार व प्लेटलेट्स के गिरने पर समय पर यथोचित इलाज नहीं होने से मरीज की मौत भी हो सकती है। विभिन्न अस्पतालों में इस वर्ष डेंगू, चिकनगुनिया से पीड़ित दर्जनों मरीजों को भर्ती किया जा चुका है।- डॉ नीरज वर्मा, पूर्व चिकित्सक, केजीएमयू