माफिया अतीक अहमद के वर्चस्व वाली इस सीट पर कैबिनेट मंत्री भाजपा के सिद्धार्थनाथ सिंह के सामने सीट बचाने की चुनौती है। पिछले चुनाव में सिद्धार्थनाथ को टक्कर दे चुकीं ऋचा सिंह को सपा ने दोबारा प्रत्याशी बनाया है। मुस्लिमों की बड़ी संख्या को देखते हुए बसपा ने गुलाम कादिर और कांग्रेस ने तस्लीमुद्दीन को चुनावी मैदान में उतार कर लड़ाई को चतुष्कोणीय बनाने की कोशिश की है।
शहर दक्षिणी : भाजपा का गढ़ लेकिन इस बार लड़ाई रोचक
शहर की दक्षिण विधानसभा सीट पर इस बार रोमांचक मुकाबला होने की उम्मीद है। भाजपा ने इस सीट से कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल नंदी को दोबारा मौका दिया है, जबकि कांग्रेस ने अल्पना निषाद को चुनावी मैदान में उतारा है। वहीं, सपा और बसपा ने इस सीट पर ब्राह्मण चेहरों पर दांव लगाया है। सपा से रईस चंद्र शुक्ला व बसपा से हाईकोर्ट बार कौंसिल के पूर्व कार्यवाहक अध्यक्ष देवेंद्र मिश्र नगरहा मैदान में हैं।
यूं तो शहर दक्षिणी की सीट पर अभी तक भाजपा का दबदबा रहा है। यहां से पं. केशरीनाथ त्रिपाठी छह बार विधायक निर्वाचित हुए। उन्होंने आखिरी चुनाव 2002 में जीता। 2007 में बसपा से मैदान में उतरे नंद गोपाल नंदी ने उन्हें 14 हजार मतों से हराया। वहीं, 2012 के चुनाव में भाजपा ने केशरीनाथ त्रिपाठी को फिर चुनाव मैदान में उतारा, जबकि बसपा ने नंदी को प्रत्याशी बनाया। लेकिन जीत का सेहरा सपा के परवेज अहमद के सिर बंधा। नंद गोपाल नंदी ने बसपा छोड़ 2017 में भाजपा का दामन थाम लिया और सपा के परवेज अहमद को लगभग 28 हजार वोटों से शिकस्त दी। नंद गोपाल गुप्ता नंदी मंत्री बनने के बाद भी क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। यही उनकी ताकत है।
ब्राह्मणों को साधने के लिए सपा ने भाजपा में रहे रईस चंद्र शुक्ला को मैदान में उतारा है। क्षेत्र में अच्छी खासी संख्या में सपा के परंपरागत मतदाता हैं। सबसे अधिक मुस्लिम मतदाता शहर दक्षिणी में हैं। पूर्व विधायक परवेज अहमद को सपा से टिकट नहीं मिलने से मुस्लिम मतदाताओं के एक वर्ग में नाराजगी है।
कांग्रेस की अल्पना निषाद भी अनुसूचित जाति के मतदाताओं के अलावा मुस्लिमों के बीच ज्यादा समय दे रही हैं। ऐसे में रईस के सामने इस नाराजगी को दूर करने के साथ नंद गोपाल गुप्ता नंदी के वोटबैंक में सेंध लगाना आसान नहीं होगा।