एक शासनादेश जहां रिलायंस जियो इंफोकाम के लिए राहत का जरिया बन गया है वहीं इसके चलते नगर निगम 150 करोड़ रुपये की आय से वंचित रह गया है।
यह शासनादेश मुख्य सचिव की ओर से जारी किया गया था। इसके तहत कंपनी को सिर्फ बैंक गारंटी जमा कर रोड कटिंग की छूट दी गई थी। यह रकम कटिंग के बाद रोड की मरम्मत कर देने पर वापस कर जाएगी।
रोड कटिंग का पैसा न जमा किए जाने के विरोध में पूर्व पार्षद अरुण तिवारी ने हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में जनहित याचिका दायर की थी।
इस पर कोर्ट ने 28 जून को निर्णय दिया था कि जब तक नगर निगम शासनादेश पर निर्णय नहीं लेता है, रिलायंस जियो इंफोकाम से मौजूदा रोड कटिंग नियमों के तहत वसूली की सकती है।
इसके बाद हुई सदन की बैठक में शासनादेश को नाममंजूर कर पुनर्विचार के लिए शासन भेजा गया है। उसके बाद भी जब कंपनी ने पैसा नहीं जमा किया तो अब इस मामले में न्यायालय में अवमानना वाद दायर किया। कंपनी के मालिक को नोटिस भी जारी की गई। यह मामला एक बार फिर चर्चा में है।
गत माह 18 अगस्त को नगर निगम सदन की बैठक में निजी कंपनी को सरकारी कंपनी बीएसनएनएल की तरह रोड कटिंग से छूट दिए जाने पर असहमति जताई गई और छूट देने वाले मुख्य सचिव के शासनादेश को नामंजूर कर दिया गया। सदन ने यह निर्णय लिया कि यदि कंपनी रोड कटिंग करेगी तो उसे पूरा पैसा जमा करना होगा।
इस आदेश पर मिली थी छूट
प्रदेश के मुख्य सचिव की ओर से 15 अक्टूबर 2012 को जारी शासनादेश मेंफोर जी सेवा केलिए रिलायंस जियो इंफोकाम लिमिटेड को रोड कटिंग का पैसा जमा करने से यह कहते हुए छूट दी गई है कि कंपनी रोड कटिंग की मरम्मत का काम खुद करेगी।
इसी आदेश में निजी कंपनी को यह राहत भी दी गई है कि उससे बीएसएनएल की तरह पिट के आधार पर रोड कटिंग की बैंक गारंटी जमा कराई जाए। मुख्य सचिव के इस आदेश के आधार पर नगर निगम ने कंपनी को रोड कटिंग करने की अनुमति दी थी। जिसके बाद कंपनी ने फोर जी नेटवर्क के लिए शहर में केबल बिछाने का काम शुरू कर दिया था।