एलडीए की हजरतगंज स्थित मल्टीलेवल पार्किंग सहित राजधानी की 17 पार्किंग केंद्रों पर ठेके की अवधि सोमवार को समाप्त हो गई।
प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि इन सारी पार्किंग पर कर्मचारियों की ड्यूटी लगाकर उनसे वसूली शुरू करवा दी गई है।
लखनऊ विकास प्राधिकरण कर्मचारी यूनियन का आरोप है कि ऑन रिकॉर्ड किसी भी कर्मचारी को पार्किंग स्थलों पर तैनात नहीं किया गया है। आरोप है कि पुराने ठेकेदार ही यहां वसूली कर रहे हैं।
एलडीए को एक निर्धारित शुल्क देकर बाकी रुपया ठेकेदार की जेब में जा रहा है, जिसमें एलडीए के अधिकारी मिले हुए हैं। एलडीए ने पार्किंग का शुल्क न बढ़ा कर जनता को राहत दी, मगर सिंडीकेट को ये नहीं भाया।
इसी वजह से ठेकेदारों ने मिल कर राजधानी की सबसे बड़ी हजरतगंज की मल्टीलेवल पार्किंग का ठेका ही नहीं डाला था। 15 जून तक ठेकेदार के हवाले रहने के बाद सोमवार को पार्किंग एलडीए के हवाले कर दी गईं।
मजे की बात यह है कि, 25 में से 17 पार्किंग का ठेका ठेकेदारों ने लिया ही नहीं। दूसरी ओर, एलडीए कर्मचारी यूनियन का आरोप है कि अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच की यह मिलीभगत है।
ठेकेदार औने-पौने शुल्क पर ठेके चाहते हैं, इसलिए वे ठेका नहीं डाल रहे हैं। मगर हम खुद ही ठेका संचालित कर सकते हैं। एलडीए के रेंट विभाग के अधिकारी रविप्रकाश अवस्थी ने बताया कि जितने भी ठेके अब ठेकेदारों के पास नहीं हैं।
वहां कर्मचारियों की ड्यूटी लगाकर वसूली शुरू करा दी गई है। जब तक नए ठेकेदार नहीं अलॉट होंगे, कर्मचारी ही वसूली करेंगे। लविप्रा कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष शिव प्रताप सिंह ने कहा कि कर्मचारियों के हाथ व्यवस्था दी गई तो प्राधिकरण को लाखों रुपये की आमदनी होगी।
कर्मचारी बहुत ही आराम से पार्किंग संभाल सकते हैं। किसी भी कर्मचारी की पार्किंग में ड्यूटी नहीं लगाई गई है। कागजों को जांचा जा सकता है। ठेकेदारों के लोग कुछ धन प्राधिकरण के अधिकारियों को देकर बाकी पैसा अपनी जेब में रखेंगे।