लंबित केसों के निपटारे में जजों की कमी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस टीएस ठाकुर अनायास ही भावुक नहीं हो गए थे। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के नए भवन के उद्घाटन के मौके पर उनके सामने मुकदमों के अंबार और न्याय में देरी पर चिंता जताई गई थी।
स्थिति यह है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में ही जजों के आधे से ज्यादा पद खाली हैं। वहीं, लंबित वादों की संख्या 9 लाख से ज्यादा बनी हुई है। लोअर कोर्ट में जजों की कमी और वादों का अंबार और भी चुनौतीपूर्ण होती जा रही है। परिणाम यह हो रहा है कि तेज निस्तारण के बावजूद मुकदमों में कमी नहीं आ पा रही है।
हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज रवींद्र सिंह यादव कहते हैं इलाहाबाद हाईकोर्ट में मुकदमे के निस्तारण की दर देश के किसी भी हाईकोर्ट से ज्यादा है। उन्होंने कहा कि पौने 11 साल में उन्होंने 1,37,778 केस निपटाये। लेकिन, जजों की निर्धारित संख्या 160 होने के बावजूद कभी भी 100 जजों की नियुक्ति तक नहीं की जा सकी।