पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन का दावा है कि नई बिजली दरों का ग्रामीण, गरीब एवं घरेलू उपभोक्ताओं पर नाममात्र का बोझ पड़ेगा। गांवों में रहने वाले और खेती से जीविका कमाने वालों की दरों में कम से कम बढ़ोतरी की गई है।
सिंचाई के लिए निजी नलकूपों की दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। कॉर्पोरेशन का तर्क है कि बिजली की औसत खरीद लागत 3.49 रुपये प्रति यूनिट के मुकाबले आपूर्ति लागत 6.11 रुपये प्रति यूनिट है।
वहीं, मुद्रास्फीति की दर लगभग 8 फीसदी और कोयले के मूल्य में लगभग 10 फीसदी की बढ़ोतरी के बावजूद कोशिश की गई है कि गरीब, ग्रामीण और घरेलू उपभोक्ताओं पर कम से कम बोझ पड़े।
पावर कॉर्पोरेशन के निदेशक (वाणिज्य) संजय कुमार सिंह ने बताया कि एक किलोवाट लोड वाले अधिकतर अनमीटर्ड ग्रामीण उपभोक्ताओं की दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है।
अगर एक किलोवाट लोड वाले ग्रामीण उपभोक्ता को लगता है कि उसका बिल ज्यादा लोड का बन रहा है तो वह बिजली कंपनी में शिकायत दर्ज कर सकता है।