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तकनीकी खामियों के कारण हुआ रेल हादसा

Sat, 21 Mar 2015 12:37 AM IST
निशांत कुमार यादव/अमर उजाला, लखनऊ
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जिन स्थितियों में जनता एक्सप्रेस हादसे का शिकार हुई, उनमें सीवीसी कपलर यात्रियों की जान बचा सकती थी। कुछ इसी तरह का हादसा जुलाई 2013 में निगोहां स्टेशन के पास हुआ था।
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तब 100 किलोमीटर की गति से दौड़ रही हरिद्वार-इलाहाबाद एक्सप्रेस की दो बोगियां क्षतिग्रस्त होने के बावजूद एक-दूसरे पर नहीं चढ़ी थीं क्योंकि उनमें सीवीसी कपलर लगे हुए थे।

वहीं, जनता एक्सप्रेस की बोगियों के बीच साधारण पेंच वाले कपलर लगे हुए हैं।

यदि सीवीसी कपलर लगे होते तो जनरल बोगी के ऊपर स्लीपर क्लास की बोगी नहीं चढ़ सकती थी। डेड एंड ट्रैक के ठोकर को तोड़ते हुए जब इंजन और आगे की जनरल बोगी एक गड्ढे में उतरी तो स्लीपर क्लास की बोगी का कपलर टूट गया।
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इसके बाद स्लीपर क्लास की बोगी ऊपर से ही जनरल बोगी को टक्कर मारते हुए उसे बुरी तरह पिचकाते हुए धंसती चली गई। आज भी जितनी नई ट्रेनों को चलाया जा रहा है, उनमें सीवीसी कपलर इस्तेमाल ही नहीं हो रहे हैं। कुल मिलाकर तकनीकी खामियों के कारण ये ट्रेन हादसा हुआ।
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नियमों की अनदेखी भी पड़ी भारी

जनता एक्सप्रेस के इंजन के ठीक बाद यदि नियमानुसार एसएलआर बोगी लगी होती तो भी जान-माल का कम नुकसान होता। मुरादाबाद रेल मंडल प्रशासन जनता एक्सप्रेस में मुरादाबाद से वाराणसी के बीच इंजन के पास दो अतिरिक्त बोगियां नियमित रूप से लगाता है। ये बोगियां रामनगर तक जाती हैं जिनको जनता एक्सप्रेस के बाद लिंक एक्सप्रेस से भेजा जाता है।

मुरादाबाद रेल मंडल प्रशासन गार्ड वाली एसएलआर बोगी के आगे की तरफ इंजन से एक स्लीपर और एक जनरल बोगियां लगाकर जनता एक्सप्रेस को रवाना करता है।

यदि नियमानुसार दोनों अतिरिक्त बोगियों को गार्ड बोगी के पास लगाया जाता और इंजन के पास एसएलआर बोगी लगी होती तो इस हादसे में जान-माल का नुकसान कम होता।

एसएलआर बोगी में  बोगी के दोनो हिस्सों में पार्सल रखने की जगह होती है। यदि एसएलआर बोगी इंजन से टकराती तो पहले उसमें रखे पार्सल के क्षतिग्रस्त होने से यात्रियों को कम चोट पहुंचती।

स्टेशन छोड़कर भागा स्टेशन मास्टर
जनता एक्सप्रेस हादसे के बाद घायलों को राहत पहुंचाने के बजाय बछरावां का स्टेशन मास्टर और रेलवे कर्मचारी भाग खड़े हुए। इस पर स्थानीय ग्रामीणों ने स्टेशन पहुंचकर जमकर हंगामा किया।
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