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सरकार नहीं, दलालों ने बढ़ा दिए प्याज के भाव

Sun, 18 Aug 2013 01:42 AM IST
लखनऊ/ब्यूरो/इंटरनेट डेस्क
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प्याज की कीमतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। आखिर कम हों भी तो कैसे। जमाखोर आढ़तियों का एक सिंडिकेट सक्रिय है और वही मनमाने दाम पर प्याज बिकवा रहा है।
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इसमें उसके सहयोगी बने हैं आढ़तिए, जो कमीशन देकर कुछ खास दुकानदारों से मनमानी कीमत पर प्याज बिकवा रहे हैं।

सिंडिकेट की ही सक्रियता का नतीजा है कि नासिक से आने वाला प्याज का ट्रक थोक मंडी में पहुंचने के बजाए खुदरा बाजार में पहुंच जा रहा है।

दरअसल बीच में ही प्याज के ट्रक गायब कर दिए जाते हैं और मंडी में पहुंचने के बजाए जमाखोरों के गोदाम में उतारी जा रही है प्याज की खेप।

यानी एक ओर जम कर हो रही है कालाबाजारी तो दूसरी ओर मंडी शुल्क की चोरी हो रही है वह अलग। कारोबारी कहते हैं कि नासिक का प्याज चार दिन से नवीन एवं दुबग्गा थोक सब्जी मंडी में नहीं पहुंचा है।

आढ़तियों का सिंडीकेट कुर्सी रोड स्थित टेढ़ी पुलिया, हेनीमैन गोमतीनगर, कैसरबाग, इटौंजा के मानपुर, कृष्णानगर स्थित बाराबिरवा में अवैध रूप से प्याज को बेच रहा है।
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दरअसल ऐसे आढ़तियों के लाइसेंस नवीन एवं दुबग्गा मंडी के हैं। शनिवार को थोक मंडी में प्याज का रेट 50 से 60 रुपए और खुदरा बाजार में 65 से 70 रुपए प्रति किलो रहा।

यानी नासिक से प्याज नहीं आया लेकिन दाम स्थिर हैं। यह कारस्तानी 10 से 12 आढ़तियों की हैं। ये आढ़तिए नासिक से आने वाले प्याज को थोक मंडी तक जाने ही नहीं दे रहे।

प्याज गोदामों में उतारा जा रहा है। इससे सीधे-सीधे 2.5 प्रतिशत मंडी शुल्क की चोरी हो रही है। नवीन सब्जी मंडी के कारोबारी बताते हैं कि 10-12 आढ़तियों ने अवैध रूप से थोक मंडी में प्याज की जमाखोरी कर रखी है।
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यह आढ़ती वहीं से खुदरा प्याज बिकवा रहे हैं। ऐसे दुकानदारों को प्याज बेचने के लिए एवज में प्रति किलो कमीशन दिया जाता है।
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