ऐसा नहीं है कि सुजीत पांडेय को अचानक हटा दिया गया। तीन मौके ऐसे आए जब लगा कि सुजीत पांडेय का लखनऊ पुलिस कमिश्नर का कार्यकाल खत्म हो गया। पहली बार जब वह जून के अंत में अचानक बीमार पड़ गए और एडीजी रेलवे संजय सिंघल को लखनऊ पुलिस कमिश्नर का चार्ज दे दिया गया।
दूसरा मौका मोहर्रम के दौरान धरने पर बैठे मौलाना कल्बे जव्वाद को उठाने को लेकर हुए विवाद ने भी सुजीत पांडेय की कुर्सी को हिला दिया था। सितंबर में आधा दर्जन एडीजी को हटाए जाने को लेकर चर्चा हुई जिसमें पुलिस कमिश्नर लखनऊ का भी नाम था।
ट्रैफिक में हुआ सुधार: कमिश्नरेट बनने के बाद लखनऊ के यातायात में अभूतपूर्व सुधार हुआ। जहां पहले सिग्नल तोड़ना आम बात हुआ करती थी, वहां बिना यातायात पुलिस के भी लोग सिग्नल के नियमों का पालन करने लगे हैं।
नए पुलिस कमिश्नर ध्रुवकांत ठाकुर दूसरी बार राजधानी के कप्तान बने हैं। पहले वह मायावती सरकार में 9 नवंबर 2010 को एसएसपी, डीआईजी के पद पर तैनात हुए थे। सत्ता परिवर्तन के बाद 17 मार्च 2012 को हटाकर डीआईजी आरटीसी चुनार भेज दिया गया था। अब दस साल बाद जब पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू हुई तो बतौर पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर लखनऊ के दोबारा कप्तान बने।