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Lucknow News: हिंदी में भी पढ़ सकेंगे भूविज्ञान, खनिज संसाधन और तकनीकी अध्ययन की रिपोर्ट

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लखनऊ। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) से जुड़े भूविज्ञान, खनिज संसाधन तकनीकी अध्ययन और पर्यावरणीय चुनौतियों के अध्ययन की रिपोर्ट अब हिंदी में भी मिलेगी। जीएसआई के लखनऊ परिसर में सोमवार से शुरू हुई दो दिवसीय अखिल भारतीय वार्षिक राजभाषा समीक्षा बैठक एवं वैज्ञानिक, तकनीकी राजभाषा संगोष्ठी में 36 शोध पत्र हिंदी भाषा में प्रस्तुत किए गए। यह सभी रिपोर्ट पहले अंग्रेजी भाषा में थी, लेकिन अब इसे हिंदी भाषा में भी तैयार किया गया है। रिपोर्ट जीएसआई की वेबसाइट पर देखी जा सकती है।
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जीएसआई के उप महानिदेशक व राजभाषा अधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि सरकार की पहल पर वैज्ञानिक व तकनीकी विषयों के लेखन में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। वैज्ञानिकों, खासकर युवा वैज्ञानिकों को राजभाषा हिंदी में लेखन के लिए प्रेरित किया जा रहा है। भूविज्ञान और तकनीकी अध्ययन से जुड़ी रिपोर्ट को हिंदी भाषा में भी तैयार किया गया है।
उन्होंने बताया कि दो दिवसीय कार्यक्रम में भूविज्ञान, खनिज संसाधन तकनीकी अध्ययन और पर्यावरणीय चुनौतियों से जुड़े विभिन्न विषयों पर भूवैज्ञानिकों की ओर से हिंदी भाषा में प्रस्तुतियां दी जाएंगी। संगोष्ठी न केवल वैज्ञानिक और तकनीकी ज्ञान को हिंदी में विकसित करने का मंच प्रदान करेगी, बल्कि हिंदी को राजभाषा के रूप में अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बनाने में भी सहायक होगी।
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जीएसआई के निदेशक ओम प्रकाश ने बताया कि चार सत्रों के दौरान भूविज्ञान से संबंधित खनिज संसाधन अन्वेषण, भू-तकनीकी अध्ययन, पुराजीव विज्ञान एवं पर्यावरणीय विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। जबकि, अखिल भारतीय वार्षिक राजभाषा समीक्षा बैठक में जीएसआई के 40 अधीनस्थ कार्यालयों की राजभाषा प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी।
उन्होंने बताया कि जीएसआई के महानिदेशक असित साहा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। उद्घाटन सत्र में भूमंथन हिंदी गृह पत्रिका और प्रस्तुत शोध पत्रों के सार-संग्रह का विमोचन किया गया। इस दौरान देश भर के भूवैज्ञानिक भी शामिल हुए।
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