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अद्भुत है मुकुटनाथ धाम की महिमा: शिवलिंग को पानी में डुबा देने दूर हो जाता है सूखा, रामेश्वर की दिखती है झलक

Mon, 22 Jul 2024 12:06 AM IST
ishwar ashish संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी

सार

बाबा मुकुटनाथ धाम के शिवलिंग में रामेश्वरम शिवलिंग की झलक दिखती है। इसे महाभारत काल का बताया जाता है। इस मंदिर से रोचक कथाएं जुड़ी हुई हैं।
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प्राचीन शिव मंदिर बाबा मुकुटनाथ धाम - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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क्षेत्र के ग्राम पंचायत ताला महादेवन स्थित प्रसिद्ध प्राचीन शिव मंदिर बाबा मुकुटनाथ धाम के शिवलिंग में रामेश्वरम शिवलिंग की झलक दिखती है। यह धाम द्वापर युग के महाभारत काल से पूर्व का बताया जाता है। यहां आने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होने के साथ ही सूखा पड़ने पर यहां के शिवलिंग में पानी भरने से सूखे से मुक्ति मिल जाती है, ऐसी मान्यता है।

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जिले के चिलबिला-अमेठी-गौरीगंज-मुसाफिरखाना राजमार्ग पर ब्लॉक अमेठी की ग्राम पंचायत ताला महादेवन स्थित प्रसिद्ध प्राचीन ऐतिहासिक शिव मंदिरों में बाबा मुकुटनाथ धाम स्थित है। स्थानीय लोगों और पुजारियों के अनुसार बाबा मुकुट नाथ धाम द्वापर युग के महाभारत कालीन से पूर्व का है।

महाभारत से पूर्व जब पांडव दूत क्रीड़ा में सबकुछ हार गए तो उन्हें 13 वर्ष का वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास मिला था। वनवास के दौरान पांडव इस वनक्षेत्र से गुजरे और यहां स्थित शिवलिंग की पूजा अर्चना कर अपना मुकुट चढ़ाया था। कहते हैं कि उसके बाद इस शिवलिंग को बाबा मुकुट नाथ के नाम से जाना जाने लगा। स्थानीय लोग बताते हैं कि कालांतर में यहां भर राजाओं का किला बना। बाबा मुकुट नाथ धाम किला परिसर में बताया जाता है। जब किला खंडहर में तब्दील हुआ तो बाबा का मंदिर भी दब गया। आज भी ताला भीटा भर राजाओं की दास्तां बयां करता है। खुदाई के दौरान स्थानीय लोगों को शिवलिंग मिला।
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मंदिर का जीर्णोद्धार कराने के लिए जब खुदाई की जा रही थी तो मजदूर खुदाई करते थक गए लेकिन शिवलिंग धरती में कितना नीचे है, इसका पता नहीं चल सका। यह शिवलिंग दक्षिण भारत स्थित रामेश्वरम के शिवलिंग जैसा है। करीब 250 वर्ष पूर्व स्थानीय लोगों ने मिलकर फिर चबूतरा नुमा शिव मंदिर का फिर से जीर्णोद्धार कराया।

मान्यता है कि यहां आने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। जब भी इस क्षेत्र में अकाल व सूखे जैसी स्थित बनती है तो मान्यता है कि लोग शिवलिंग को पूरा पानी से डूबो देते हैं और फिर भारी वर्षा होती है। इस धाम पर सावन और अधिमास में भक्तों का मेला लगता है। एक माह तक लगातार सावन मास में श्रद्धालु कांवड़ यात्रा लेकर जाते हैं। सुदूर क्षेत्रों से आकर कांवड़िये शिवालय में जलाभिषेक करते हैं।

प्रसिद्ध शिवालय परिसर में श्रीमद् भागवत, शिव पुराण, रामचरितमानस पाठ सहित अन्य पुराण प्रकांड विद्वानों द्वारा सुनाया जाता है। जहां भक्त पहुंचकर कथाओं का श्रवण करते हैं। बाबा मुकुटनाथ धाम में मंगलवार को भारी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक करने के लिए आते हैं। महाशिवरात्रि पर्व पर करीब 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।

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पुरातत्व विभाग भी नहीं बता सका सही आंकलन

बाबा मुकुट नाथ धाम में खुदाई के दौरान मिले मुख्य शिवलिंग और खंडित देवी देवताओं की मूर्तियां कितने हजार वर्ष पुरानी हैं। इसकी अनुमानित ही रिपोर्ट दी है। हालांकि स्थानीय लोगों के अनुसार यहां पर मिलीं खंडित मूर्तियां द्वापर युग की बताई जाती हैं।

बाबा मुकुट नाथ धाम परिसर में पुराना हनुमान मंदिर, नवनिर्मित हनुमान मंदिर, नंदी महाराज व अन्य कई मंदिर भी बने हैं। इसके अलावा दुर्गा मंदिर निर्माणाधीन है। परिसर में हाई मास्टलाइट एवं श्रद्धालुओं के जलभरने के लिए टोटियां और बारादरी के साथ दो तरफ पक्का ग्राउंड बनाया गया है। श्रद्धालुओं के बैठने के लिए कुर्सियां भी बनी हैं।
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