पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी।
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गांधी परिवार की सीट इतिहास की उस घटना की भी गवाह रही है, जिसमें परिवार के बीच ही रार छिड़ गई थी। दोस्ती के बीच ऐसी दरार पड़ी जो कभी नहीं भर सकी। रिश्ते में चचेरे भाइयों से दोस्त बने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और पूर्व केंद्रीय मंत्री व रायबरेली के सांसद रहे अरुण नेहरू की राह एक दूसरे से जुदा हो गई। दोनों एक-दूसरे से फिर कभी भी गर्मजोशी से नहीं मिले। बोफोर्स का जिन्न भी जब उठा तो दोनों के बीच की तकरार को रायबरेली ने पास से देखा।
रायबरेली के सियासी अखाड़े में पूर्व केंद्रीय मंत्री और दो बार के सांसद रहे अरुण नेहरू को 80 के दशक में मिनी प्रधानमंत्री माना जाता था। इंदिरा गांधी ने जब 1980 में रायबरेली और मेडक से जीतने के बाद रायबरेली सीट को छोड़ा तो भतीजे अरुण नेहरू को रायबरेली से सांसद बनाने का निर्णय लिया।
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1981 के लोकसभा उपचुनाव में अरुण नेहरू ने जनता पार्टी के और छोटे लोहिया के नाम से मशहूर रहे जनेश्वर मिश्र को हराया। इंदिरा गांधी ने भतीजे अरुण नेहरू पर बड़ी जिम्मेदारी दी तो दिल्ली में अरुण नेहरू का कद बढ़ गया। मां के विश्वासपात्र होने के कारण पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की अपने चचेरे भाई अरुण से गहरी दोस्ती हो गई।
राजीव ने भाई संजय गांधी के निधन के बाद राजनीति में कदम रखा और अरुण नेहरू उनके सलाहकार बने। इसके बाद 1985 में जब अरुण नेहरू को केंद्रीय ऊर्जा मंत्री के पद से हटाया गया तो उसके बाद दोस्ती की जगह दरार का रास्ता खुल गया। नतीजा यह रहा कि अरुण नेहरू ने कांग्रेस छोड़ दिया।