डॉ संपूर्णानंद बड़े राजनेता, दार्शनिक और संस्कृत के प्रकांड विद्वान थे। लोग उन्हें हिंदूवादी नेता मानते थे। जब संपूर्णानंद प्रदेश के मुख्यमंत्री थे तो उस वक्त वाराणसी के मिर्जा असगर हुसैन से कही बात, जनाब हर वक्त अरब और ईरान की तरफ न देखा कीजिए' खबरों की सुर्खियां बनी हुई थी।
यह दुष्प्रचार चरम पर था कि मुख्यमंत्री ने मिर्जा को यह जवाब उर्दू की तरक्की की मांग करने पर दिया। उनकी छवि उर्दू विरोधी बन रही थी। डॉ संपूर्णानंद के पारिवारिक मित्र शायर नजीर बनारसी ने लिखा है कि डॉ संपूर्णानंद ने उर्दू पर नहीं बल्कि किसी अन्य बात पर अरब और ईरान की तरफ न देखने की बात कही थी, जिसे मिर्जा ने तोड़ मरोड़कर दुष्प्रचारित कराया।
नजीर बनारसी लिखते हैं कुछ दिन बाद मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित मुशायरे में शिवमूरत लाल कैस, नवाब जाफर अली खां असर लखनवी के अलावा कानपुर के दो शायर बुलाए गए। मुशायरे के बीच में अचानक मुख्यमंत्री माइक पर आकर बोले 'आप बड़े उर्दू विद्वानों के बीच मैं भी कुछ पढ़ना चाहता हूं' इसके बाद उन्होंने जो शेर पढ़ना शुरू किए तो सभी वाह-वाह कर उठे।
पता चला वे आनंद के नाम से शेरो-शायरी, गजलें भी लिखते हैं। अगले दिन सुबह जब सभी लोग चाय पर बैठे तो मुख्यमंत्री ने कहा 'नजीर साहब आपने देखा मिर्जा असगर ने किस तरह मुझे बदनाम किया। मैंने क्या गलत कहा था। जिस तरह ईरान वाले रुस्तम और सोहराब पर फख्र करते हैं क्या उसी तरह हम लोग अपने पूर्वजों पर नहीं कर सकते।'