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चुनावी चकल्लस: बेचारे नेताजी घर के रहे न घाट के

Sat, 12 Feb 2022 12:41 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

एक नेता जी टिकट पाने के लिए हर जुगत लगा रहे थे पर अंतिम समय में किए गए बदलाव ने उनके इरादों पर कुठाराघात कर दिया। अब वो अपनों के बीच ही फजीहत बन रहे हैं।
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neta - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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पिछले दो चुनाव से माननीय बनने के फेर में जुटे एक नेताजी इस बार भी टिकट के चक्कर में थे। टिकट तो मिला नहीं, ऊपर से न घर के रहे और न घाट के। दरअसल, पिछले चुनाव में नेताजी पूर्वांचल की एक सीट से भगवा दल की सहयोगी पार्टी के टिकट पर मैदान में उतरे थे। पर, उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था। इस बार भी वह भगवा दल के नए सहयोगी बने एक दूसरे दल पर टिकट के लिए खूब डोरे डाल रहे थे।
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सहयोगी दल ने उन्हें टिकट के लिए कुछ मानक बताए थे। अब नेता बनना है, तो इतना तो करना ही पड़ेगा, यही सोचकर नेताजी ने मानक पूरा करने के लिए घर-परिवार से लड़ाई भी लड़ ली। पर, जब टिकट की घोषणा हुई तो  नेताजी का नाम नदारद था।

इस बारे में नेताजी ने जब दल के अध्यक्ष से मुलाकात की, तो उन्होंने बताया कि हमने मानक में संशोधन कर दिया है, जिसे आप पूरा नहीं कर पाएंगे। इसलिए हमने नए पैमाने पर खरा उतरने वाले को टिकट दे दिया है। यह सुनते ही नेताजी के पैरों तले से जमीन खिसक गई।
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उधर, घर में भी नेताजी की अब खूब फजीहत हो रही है।
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