महानिदेशक ने बताया कि आरडीएसओ के विशिष्टीकरण मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए आरडीएसओ द्वारा सभी डिजाइनों की समीक्षा की गई है।
यह विश्व का सबसे शक्तिशाली रेल इंजन है। इसकी क्षमता 12000 हॉर्स पावर है। यह अधिकतम 120 किमी प्रति घंटे की गति से चल सकता है। यह लोको लंबी और भारी मालगाड़ियों को मुख्य लाइन के साथ-साथ डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) पर गति देने में सहायक साबित होगा।
यह डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर 75 किमी प्रति घंटे की संतुलन गति को आसानी से प्राप्त कर लेगा। भारत में निर्मित होने वाले सभी लोकोमोटिव 90% से अधिक स्थानीयकरण के साथ सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ के तहत बनाए गए हैं।
आरडीएसओ की ओर से गत वर्ष 7 दिसंबर से 18 दिसंबर तक उत्तर रेलवे के अंबाला डिवीजन में 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर परीक्षण किया गया।
वहीं, पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा डिवीजन में आरडीएसओ ने इसी वर्ष पहली जनवरी से 12 जनवरी तक 132 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से इस इंजन का परीक्षण किया था।
इसके बाद मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त ने गत पांच मार्च को डब्ल्यूएजी 12बी लोकोमोटिव की मंजूरी के लिए रेलवे बोर्ड की सिफारिश की, जिसकी अनुमति रेलवे बोर्ड ने 28 अप्रैल को दी। फिलहाल 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से इंजन को चलाने की अनुमति मिली है, जिसे बाद में बढ़ाया जा सकेगा।