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चिंताः लखनऊ के पॉश इलाकों में कोरोना सबसे तेज, यूपी का ये है हाल

Mon, 10 Aug 2020 03:36 PM IST
ishwar ashish चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
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कोरोना की रफ्तार लखनऊ में पूरे प्रदेश के मुकाबले दूने से भी ज्यादा है। जहां पूरे प्रदेश में मरीजों की मिलने की दर औसतन 3.90 फीसदी है तो लखनऊ में यह दर 8.90 फीसदी। 1 से 9 अगस्त के बीच ही करीब पांच हजार मामले कोरोना के सामने आए। आंकड़े यह भी बता रहे हैं कि वीआईपी इलाकों में सबसे तेज गति से मरीज बढ़ रहे हैं।

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जबकि चौक जैसे घने बसे इलाके में संक्रमण की रफ्तार काफी कम है। ये आंकड़े हमारी लापरवाहियों की कहानी भी बता रहे हैं। राजधानी में प्रतिदिन पांच हजार से अधिक सैंपल की जांच हो रही है। कुल मरीज 12,500 से अधिक हैं। यदि सैंपल की अपेक्षा पॉजिटिव मरीजों के मिलने की दर देखें तो यह 8.90 फीसदी है। प्रदेश में संक्रमितों के मिलने की दर 3.90 फीसदी है और देश की 9.14 फीसदी। 


इंदिरानगर में दर 12.20 फीसदी तो गोमती नगर के कई इलाकों 10-11 फीसदी 
शहरी इलाके में आलमबाग, चौक और ऐशबाग जैसे घने इलाकों के साथ ही गोमती नगर, इंदिरानगर और जानकीपुरम जैसे वीआईपी इलाकों में भी लगातार पॉजिटिव मरीज मिल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार अगस्त में गोमती नगर में अयोध्या रोड की कॉलोनियों में 11 फीसदी, गोमती नगर में 10 फीसदी की दर से मरीज पाए गए हैं। इंदिरानगर में यह दर 12.20 फीसदी तक पहुंच गई है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग में इन इलाकों में सैनिटाइजेशन और निगरानी बढ़ा दी है।

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शहर से सटे ग्रामीण इलाकों में भी बढ़ा फैलाव
जुलाई तक शहर से सटे ग्रामीण इलाके में वायरस का फैलाव नहीं था, लेकिन अगस्त में काकोरी, मड़ियांव, मोहनलालगंज, सरोजनी नगर और मलिहाबाद इलाके में भी पॉजिटिव मरीज पाए जा रहे हैं।

चौक में महज 3.40 फीसदी ही दर

आलमबाग में मरीजों की मिलने की दर 9.20 फीसदी है। जबकि राजधानी के सबसे घने इलाकों में से एक चौक में संक्रमितों के मिलने की दर 3.40 फीसदी है। 

वजहें क्या...लोगों के तर्क
तर्क दिया जा रहा है कि राजधानी में दूसरे जिलों से भी लोगों का आवागमन अधिक होता है। इसलिए वायरस का फैलाव बढ़ा है। कुछ लोग इसे जिम्मेदार विभागों की लापरवाही भी करार देते हैं। ये तर्क देने वालों की दलील होती है कि वीकली लॉकडाउन में भी लोगों का आवागमन बेरोकटोक जारी रहता है। 
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खुद से सवाल कीजिए...खुद को जवाब दीजिए...थम जाएगी संक्रमण की दर

- क्या हम मास्क का इस्तेमाल पूरी तरह से करते हैं?
- क्या सोशल डिस्टेंसिंग का हम खुद ख्याल रखते हैं? 
- सैनिटाइजेशन का हम कितना ख्याल रख रहे हैं?

दावा : 15 दिन बाद नियंत्रण में होगी स्थिति
राजधानी में हर जगह से लोगों का आना-जाना रहता है। यहां की टीम ने सर्वाधिक सैंपल लेने का रिकॉर्ड बनाया है। मरीजों के मिलने की दर नियंत्रित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उम्मीद है कि 15 दिन के बाद स्थितियां नियंत्रित मिलेंगी। - डॉ. आरपी सिंह, सीएमओ
 
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