योगी कैबिनेट ने गोरखपुर में क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला (फोरेंसिक लैब) के निर्माण के लिए पुनरीक्षित योजना को मंजूरी दे दी है। इस पर 33.21 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने बताया कि पूर्व में प्रदेश में 18 विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं के निर्माण के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति हुई थी।
गोरखपुर में विधि विज्ञान प्रयोगशाला को क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, जनसंख्या, अपराधों की संख्या व प्रकृति और थानों की संख्या को देखते हुए श्रेणी बी से ए में उच्चीकृत कर दिया गया है। पहले श्रेणी ए में गाजियाबाद, कन्नौज और आगरा को रखा गया था।
गोरखपुर को झांसी, इलाहाबाद, मुरादाबाद और वाराणसी के साथ श्रेणी बी में रखा गया था। अभी तक प्रदेश में लखनऊ, मुरादाबाद, आगरा और वाराणसी में एक-एक विधि विज्ञान प्रयोगशाला है। 12 जिलों में फोरेंसिक लैब बनाने का कार्य चल रहा है। गोरखपुर में बनने वाली लैब के लिए राजकीय निर्माण निगम को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है।
प्रदेश कैबिनेट ने यूपीएसआईडीसी से यूपीसीडा में शामिल कर्मियों को भी यूपी औद्योगिक विकास प्राधिकरण केंद्रीयत सेवा नियमावली-2018 के दायरे में लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इससे इन कर्मियों को भी औद्योगिक विकास प्राधिकरण के कर्मियों के समान सभी तरह की सुविधाएं मिलेंगी और एक प्राधिकरण से दूसरे में तबादले की व्यवस्था लागू हो सकेगी।
सरकार ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेस-वे, गीडा, सीडा, लीडा, यूपीसीडा व यूपीडा के कार्मिकों की सेवाओं में एकरूपता लाने और सेवा-शर्तों, पदनाम, वेतनमान को समान बनाने के लिए यूपी औद्योगिक विकास प्राधिकरण केंद्रीयत सेवा नियमावली-2018 को 22 जून को मंजूरी दी थी। हाल में यूपीएसआईडीसी के कार्मिकों का यूपीसीडा में विलय हो चुका है।