स्कूटर इंडिया से सटे जंगलों में तेंदुए की तलाश में लगाए गए कैमरों में दिखे वराह
- फोटो : amar ujala
लखनऊ में मौजूद वाइल्डलाइफ की संभावनाओं को सरोजनीनगर ने एक बड़ी सौगात दी है। बीते दिनों यहां भटक रहे तेंदुए की सूचना पर खोज में लगाए गए नाइट ट्रैप कैमरों में ऐसे जीवों को कैद किया गया है, जिनका शहर से सटे जंगलों में मौजूद होना किसी सौगात से कम नहीं है। सरोजनीनगर में स्कूटर्स इंडिया से सटे जंगलों में वन विभाग को दुर्लभ वाइल्ड बोर (वराह या जंगली सुअर) की मौजूदगी दिखी है। इसके अलावा कई अन्य जीवों की मौजूदगी भी पाई गई है। विशेषज्ञ इसे वाइल्डलाइफ के लिए अच्छा मान रहे हैं।
बीते दिनों सरोजनीनगर बंथरा के आसपास के जंगली इलाकों में तेंदुआ और अज्ञात हिंसक वन्यजीव देखे जाने की सूचना पर वन विभाग ने उन इलाकों में नाइट कैमरा ट्रैप और पिंजड़ा लगाए थे। कई सूचनाएं स्कूटर इंडिया के पास जंगलों के आसपास से मिली थीं। डीएफओ लखनऊ डॉ. रवि कुमार सिंह ने बताया कि यहां लगाए गए कैमरों में रात्रि वन्यजीवों की तस्वीरें कैद हुईं तो वन विभाग की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इन कैमरों में वाइल्ड बोर (वराह), सांभर, जंगली बिल्लियां, साही, लकड़बग्घे-सियार आदि की तस्वीरें कैद हुईं। इनमें से वाइल्ड बोर (वराह) और जंगली बिल्ली की मौजूदगी को वन विभाग अच्छा संकेत मान रहा है।
इकोसिस्टम बहुत मजबूत
प्रदेश के वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट और लखनऊ के वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. उत्कर्ष शुक्ला बताते हैं कि शहरी सीमा से सटे जंगली इलाके में सांभर, जंगली बिल्ली और दुर्लभ वाइल्डबोर का दिखना साबित करता है कि उस क्षेत्र में इकोसिस्टम बहुत मजबूत है। वहां शाकाहारियों के लिए भी भोजन है और मांसाहारियों के लिए भी।
शायद इसीलिए बीते दिनों वहां तेंदुआ जैसे या दूसरे अन्य हिंसक वन्यजीव दिखने की घटना सामने आई। प्रदेश के विशुद्ध और बड़े जंगली इलाकों में वाइल्ड बोर पाए जाते हैं। शहरी इलाकों से सटे जंगलों में इनकी मौजूदगी इशारा करती है कि जंगल का तंत्र बहुत मजबूत है।
यहां भी है वाइल्डलाइफ की रौनक
लगभग पांच हजार एकड़ में फैले कुकरैल वन क्षेत्र के अलावा ढाई सौ एकड़ से अधिक के मूसाबाग वन क्षेत्र, गोमती नगर के बाघमऊ के जंगलों में भी आए दिन वाइल्डलाइफ गतिविधियों की झलक मिल जाती है। बाघमऊ के जंगलों में अक्सर हिरणों के देखे जाने की सूचना रहती है।
जू में बाघिन इप्शिता की तबीयत बिगड़ी
लखनऊ जू की बुजुर्ग बाघिन इप्शिता की तबीयत खराब है। लगभग 19 साल की बाघिन वृद्धावस्था के कारण अस्वस्थ होने के लक्षण प्रकट करने लगी है। वह बहुत कम मात्रा में खुराक ले पा रही है। निदेशक जू आरके सिंह ने बताया कि दिसंबर 2018 में तबीयत खराब होने के बाद इसे इसके बाड़े से वन्यजीव चिकित्सालय लाया गया था।
कुछ दिनों इलाज के बाद वह स्वस्थ तो हो गई लेकिन उसे चिकित्सालय में ही रखा गया, ताकि बढ़ती आयु में चिकित्सकों की निगरानी में रहे। गुरुवार से उसकी तबीयत फिर बिगड़ी है। वन्यजीव चिकित्सालय में ही पशु चिकित्सक और कीपर उसकी देखभाल कर रहे हैं। इप्शिता को 2007 में उड़ीसा के नंदन कानन प्राणी उद्यान से लखनऊ जू लाया गया था, तब वह छह वर्ष की थी।
इधर, मदारीपुर में दिखा तेंदुआ जैसा जानवर
बख्शी का तालाब सरोजनीनगर, चिनहट व माल के बाद अब बीकेटी के गांव मदारीपुर में आम के बाग में ग्रामीणों ने तेंदुआ जैसे किसी जंगली जानवर को देखे जाने का दावा किया है। ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग की टीम ने मदारीपुर गांव में जाकर स्थलीय निरीक्षण किया और वहां मिले पग मार्ग के नमूने लेकर परीक्षण के लिए भेजा है।
बीकेटी वन विभाग के रेंजर आनंद प्रकाश श्रीवास्तव का कहना है अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे यह कहा जा सके कि ग्रामीणों द्वारा देखे जाने वाला जानवर तेंदुआ ही है। रेंजर ने बताया कि प्रथम दृष्टया जो चिन्ह मिले हैं वह डॉग प्रजाति के किसी जानवर के प्रतीत हो रहे हैं। वन विभाग की टीम जांच कर रही है।