पद पर बने रहने के लिए पूरे करने होंगे नियम
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कारागार मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया अगर एक सप्ताह में उच्च सदन में नहीं पहुंचे तो उनका मंत्री पद चला जाएगा। उनका मंत्री पद बचाने के लिए प्रदेश सरकार विधान परिषद में मनोनयन के लिए छह नामों की सूची एक-दो दिन में राजभवन भेज देगी।
रामूवालिया को गत 31 अक्तूबर को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई थी। नियमानुसार मंत्री बनने के छह माह के भीतर किसी न किसी सदन का सदस्य बनना जरूरी है। 30 अप्रैल को उनके मंत्री पद के छह माह पूरे हो जाएंगे।
ऐसे में उनके लिए मनोनयन के जरिये ही विधान परिषद में पहुंचने का एकमात्र रास्ता है। परिषद के छह मनोनीत सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो चुका है। उनकी जगह नए सदस्य मनोनीत होने हैं।
पांच सदस्यों का मनोनयन 11 माह से अटका हुआ है जबकि एक सदस्य का कार्यकाल एक पखवाड़ा पहले पूरा हुआ है। राज्य सरकार ने मनोनयन के लिए जो नाम भेजे थे, उनमें से पांच पर राज्यपाल को आपत्ति थी।
इनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज थे और वे किसी क्षेत्र के विशेषज्ञ भी नहीं थे। इनके मनोनयन की फाइल राज्यपाल राम नाईक ने प्रदेश सरकार को लौटा दी है और नए नाम भेजने को कहा है।
सीएम बढ़ाना चाहते हैं युवाओं की मौजूदगी
30 अप्रैल को मंत्री पद के छह माह होंगे पूरे
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सपा सूत्रों का कहना है कि विधान परिषद में मनोनयन के लिए चार नाम तय कर लिए गए हैं। दो नामों को अभी अंतिम रूप दिया जाना है।
अपुष्ट सूत्रों के मुताबिक इनमें एक नाम जयाप्रदा का है। हालांकि इसे लेकर शीर्ष नेतृत्व एकराय नहीं है। वहीं, मुख्यमंत्री विधान परिषद में युवाओं की नुमाइंदगी बढ़ाना चाहते हैं।
सपा नेताओं में यह भी चर्चा है कि रामूवालिया को जून के अंत में होने वाले चुनाव में राज्यसभा भेजा जा सकता है। हालांकि कुछ लोग इससे इत्तेफाक नहीं रखते। उनका कहना है कि सपा मुखिया ने उन्हें मंत्री बनवाया है, इसलिए विधान परिषद में उनका जाना तय है।
सोमवार तक राजभवन को उनके नाम का प्रस्ताव भेज दिया जाएगा। यदि रामूवालिया को राज्यसभा भेजा जाना है तो विधान परिषद में मनोनयन के लिए राजभवन को नाम भेजने में देरी हो सकती है। इसे लेकर एक-दो दिन में स्थिति साफ हो जाएगी।