जिंदगी में कई बार ऐसे मौके आते हैं जब इंसान को अपने कर्तव्य या या धर्म में से किसी एक को चुनना होता है। और बिरले होते हैं वे लोग जो धर्म की बजाय कर्तव्य को पूरा करने को तरजीह देते हैं।
कुछ ऐसा ही हुआ बीएड प्रवेश परीक्षा के राज्य समन्वयक बनाए गए लखनऊ विश्वविद्यालय के जूलॉजी विभाग के प्रोफेसर वाईके शर्मा के साथ। जिंदगी के अजीब से दोराहे पर खड़े प्रो. शर्मा ने कर्तव्य को प्राथमिकता दी।
दरअसल, परीक्षा के ठीक एक दिन पहले गुरुवार को जब प्रो. शर्मा अपनी टीम के साथ तैयारियों को अंतिम रूप दे रहे थे तभी उनके मोबाइल फोन पर बड़े भाई दिनेश प्रदीप का फोन आया।
दूसरी तरफ से दिनेश ने जो कहा वह सुनकर प्रो. शर्मा सन्न रह गए। परीक्षा के बाद वह अपनी जिस मां शारदा देवी (83 वर्ष) से मिलने बुलंदशहर के खुर्जा जाने वाले थे, उनका निधन हो चुका था। उनकी मां काफी दिनों से बीमार चल रही थीं।
पहले तो प्रो. शर्मा ने सोचा कि वह मां को आखिरी बार देखने खुर्जा जाएंगे। मगर, अगले ही पल दिल ने सवाल किया कि उस जिम्मेदारी का क्या होगा जो एक विश्वास के साथ उन्हें सौंपी गई है। बीएड प्रवेश परीक्षा में तीन लाख से अधिक अभ्यर्थी बैठने वाले हैं।
अगर परीक्षा में कुछ भी ऊंच-नीच हो गई तो वह खुद को माफ नहीं कर पाएंगे। इससे लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य जुड़ा है। यही बात मन में आते ही उन्होंने न जाने का निर्णय लिया। गुरुवार की रात करीब साढ़े आठ बजे उनकी मां का खुर्जा में अंतिम संस्कार भी कर दिया गया, लेकिन वह उन्हें अंतिम बार देख भी न सके।