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रामलला दर्शन: अपने वाहन से अयोध्या जा रहे हों तो जरूर पढ़ लें ये खबर, नहीं तो हो सकते हैं परेशान

Tue, 30 Jan 2024 08:06 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला संवाद, अयोध्या

सार

यदि आप अपने वाहन से जाकर अयोध्या दर्शन करना चाहते हैं तो यह खबर आपके लिए है। प्रशासन ने निजी वाहनों के लिए व्यवस्था बदल दी है। 
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अयोध्या राम मंदिर के बाहर कतारें। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 यदि आप रामलला के दर्शन के लिए अपने चार पहिया वाहन से अयोध्या आ रहे हैं तो एक से चार किलोमीटर तक पैदल चलने को तैयार रहें। फिलहाल उदया चौराहे से चार पहिया वाहनों के प्रवेश पर पूर्व में लगाई गई रोक हटा ली गई है। अब टेढ़ी बाजार चौराहे तक इन्हें जाने दिया जा रहा है। इसी तरह एनएच-27 से आने वाले वाहनों को धर्मपथ से पहले हनुमान गुफा पर रोक दिया जा रहा है। लता मंगेशकर चौक के बैरियर से भी कोई वाहन आगे नहीं जा सकते हैं।

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अपने वाहनों से अयोध्या आ रहे दर्शनार्थी आराध्य के दर्शन के लिए परिवार के सदस्यों के साथ काफी पैदल चलने के बाद ही राम मंदिर तक पहुंच पा रहे हैं। राम पथ और धर्म पथ पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के चलते यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के उदेश्य से यह व्यवस्था प्रभावी की गई है। 

लखनऊ के रास्ते विभिन्न जिलों से आने वाले श्रद्धालु हाईवे से सहादतगंज के बाद फैजाबाद में प्रवेश कर राम पथ से उदया चौराहे होते हुए टेढ़ी बाजार चौराहे तक बिना रोक-टोक पहुंच जा रहे हैं। टेढ़ी बाजार पर इन्हें बहुमंजिली पार्किंग में अपने वाहन खड़े करने पड़ रहे हैं। यहां से राम मंदिर की दूरी एक किमी है। इसी तरह गोरखपुर, बस्ती और गोंडा के रास्ते आने रामभक्तों के वाहन धर्म पथ से पहले हनुमान गुफा पर रोके जा रहे हैं। यहीं पर पार्किंग के बाद पैदल ही राम मंदिर जाना मजबूरी है। यहां से मंदिर तक चार किमी का सफर पैदल तय करना होता है।
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परिवार के साथ आए बुजुर्ग और बच्चे हो रहे परेशान
रामलला के दर्शन के लिए अपने वाहनों से आने वाले श्रद्धालुओं में शामिल बुजुर्गों और बच्चों को इस ठंड में पैदल चलने में परेशानी हो रही है। राम पथ पर निर्धारित दूरी में ई-रिक्शा के भी न चलने से दिक्कत और बढ़ जा रही है। मंगलवार को हरदोई से परिवार के साथ पहुंचे अभिषेक सिंह टेढ़ी बाजार से पैदल ही राम मंदिर की ओर बढ़ रहे थे। उनके साथ बुजर्ग पिता और सात वर्ष की बेटी भी थी। उन्होंने कहा कि मुझे और पत्नी को तो कोई दिक्कत नहीं लेकिन पिता और बेटी को पैदल ले जाना खल रहा है। फिर भी क्या कर सकते हैं जब कोई और विकल्प ही नहीं है।

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