नामांकन पत्र देते रामजी गौतम। (फाइल फोटो)
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यूपी की सियासत में बुधवार का दिन नाटकीय घटनाक्रम से भरा रहा। राज्यसभा चुनाव की तैयारी में जुटी बसपा को उस वक्त करारा झटका लगा जब उसके छह विधायकों ने बगावत का बिगुल बजा दिया। सभी विधायकों ने सपा अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात कर नए सियासी ठिकाने का संकेत दे दिया। इससे पहले इनमें से चार विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में बसपा उम्मीदवार रामजी गौतम के प्रस्तावक के रूप में अपना नाम वापस लेने की अर्जी पेश तक हड़कंप मचा दिया। उन्होंने बसपा को नेतृत्व को कटघरे में खड़ा किया, भाजपा के इशारे पर काम करने और अपनी अनदेखी का आरोप लगाया।
विधानसभा के सेंट्रल हॉल में बुधवार को 11 बजे से नामांकन पत्रों की जांच शुरू हुई। भाजपा के प्रदेश महामंत्री एवं चुनाव प्रबंधन प्रभारी जेपीएस राठौर के नेतृत्व में पार्टी के उम्मीदवार या उनके एजेंट नामांकन पत्रों की जांच के लिए पहुंचे। जांच का सिलसिला शुरू ही हुआ था कि करीब साढ़े 11 बजे बसपा विधायक असलम चौधरी, असलम राइनी, हाकिम लाल बिंद और मुजतबा सिद्दीकी सेंट्रल हॉल पहुंचे और निर्वाचन अधिकारी के समक्ष बसपा उम्मीदवार रामजी गौतम के प्रस्तावक के रूप में अपना नाम वापस लेने की अर्जी देकर सभी को चौंका दिया। प्रदेश ही नहीं, देश के राजनीतिक इतिहास में संभवत: यह पहला मौका था, जब किसी राजनीतिक दल के विधायकों ने इस तरह पार्टी से बगावत की हो। राइनी ने तो अपने हस्ताक्षर कूटरचित होने का आरोप लगाया।