रामगोपाल यादव को सम्मानित करते मुलायम सिंह
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सपा के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सदस्य प्रो. रामगोपाल यादव ने बेबाकी से कहा कि मुझे कोई गलतफहमी नहीं है। मैं आज जो कुछ भी हूं, नेताजी (मुलायम सिंह यादव) की वजह से हूं। मेरे न चाहते हुए भी वे मुझे राजनीति में लाए। उन्हीं के कारण 24 साल से बिना गैप के संसद में हूं। राज्यसभा के 245 सदस्यों में पांच-सात ही मुझसे सीनियर हैं।
रामगोपाल ने अपनी पुस्तक ‘संसद में मेरी बात’ के विमोचन अवसर पर कहा, मैं डिग्री कॉलेज में लेक्चरर था। एक दिन नेताजी आए और ब्लॉक प्रमुख के लिए नामांकन करने को कहा। मैं ब्लॉक प्रमुख चुना गया। 1989 में इटावा जिला पंचायत का अध्यक्ष बना।
पांच जुलाई 1992 को राज्यसभा भेज दिया गया। उस समय हमारी पार्टी के 29 एमएलए थे। जीतने के लिए 36 विधायकों की जरूरत थी, लेकिन मुझे पहली वरीयता के 46 मत मिले।
...जैसे वेश्या दे रही हो पतिव्रता धर्म का उपदेश
रामगोपाल यादव
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रामगोपाल ने कहा, 24 साल के संसदीय जीवन में मेरे बोलने पर केवल दो बार व्यवधान हुआ। पहली बार, जब बाबरी मस्जिद मामले को लेकर चर्चा चल रही थी। राज्यसभा में सिकंदर बख्त भाजपा के नेता थे। वे इस तरह बोले जैसे अयोध्या में भाजपा ने कुछ किया ही नहीं हो।
मैंने कहा कि वेश्या पतिव्रत धर्म का उपदेश दे रही है। इस पर हंगामा हुआ लेकिन पीठासीन अधिकारी नजमा हेपतुल्ला ने इसे असंसदीय नहीं माना। दूसरी बार, परमाणु करार पर मेरे बोलने के समय बसपा के सदस्यों ने व्यवधान किया और सदन को स्थगित करना पड़ा।
पैसे की भूमिका होती तो 2012 में बसपा जीतती चुनाव
सपा महासचिव ने कहा कि राजनीति में प्यार और आशीष की ताकत होती है। पैसे की भूमिका सिर्फ दो-तीन प्रतिशत होती है। यदि पैसे से चुनाव जीता जाता तो 2012 में मायावती चुनाव जीततीं। उनके बराबर पैसा किसके पास था।