राम मंदिर चढ़ावा धनराशि प्रकरण की विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने बुधवार को अदालत में जो आरोपपत्र दाखिल किया, उसका आकार भी चर्चा का विषय बना रहा। 36,039 पन्नों की चार्जशीट को चार बक्सों और दो गत्तों में भरकर अदालत लाया गया। आरोपपत्र दाखिल होने के बाद अदालत में दस्तावेजों का मिलान और परीक्षण शुरू हुआ।
राम मंदिर चढ़ावा धनराशि प्रकरण में अदालत ने अधिवक्ता संघ की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र का निस्तारण कर दिया। अदालत के अनुसार विवेचना में शामिल किए जाने के लिए अधिवक्ताओं की ओर से दिए गए शपथपत्रों के संबंध में कोई साक्ष्य नहीं पाया गया। इसके आधार पर अधिवक्ता संघ के प्रार्थना पत्र को निस्तारित कर दिया गया। प्रकरण में रिमांड की अगली तिथि सात अक्तूबर निर्धारित की गई है।
अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद।
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सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा, चढ़ावा चोरी में मुख्य दोषियों को बचाने के लिए छोटी मछलियों को फंसाया गया है। कहा कि पहले राम मंदिर का चढ़ावा चोरी हुआ और अब लोगों के घरों में रखा सामान उजाड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन्होंने भगवान राम को भी नहीं छोड़ा, वे जनता को क्या छोड़ेंगे। अवधेश प्रसाद ने कहा कि अयोध्या से ही भाजपा की सरकार बनी थी और अब जनता के साथ हो रहे अन्याय का जवाब भी अयोध्या की जनता देगी। उन्होंने कहा कि अयोध्या से सरकार आई थी और अब अयोध्या से ही सरकार जाएगी।
अधिवक्ता संघ का आरोप है कि चोरी की धनराशि जिन लोगों के पास से बरामद हुई, उन्हें आरोपी नहीं बनाया गया। संघ के अनुसार ट्रस्ट के कृष्ण मोहन के लॉकर से बरामद 81.19 लाख रुपये का भी आरोपपत्र में उल्लेख नहीं है। वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने विवेचक की ओर से प्रस्तुत आरोपपत्र वापस करने, संघ के प्रार्थनापत्र के आधार पर जांच का आदेश देने और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्र, गोपाल राव व कृष्ण मोहन को तलब करने की मांग की।