चढ़ावा चोरी के आरोपियों और उनके परिजनाें के करीब 30 बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए हैं। पुलिस ने संबंधित बैंकों से इन खातों का पूरा ब्योरा जुटाया है। जिसमें आय से अधिक ट्रांजेक्शन मिले हैं। लिहाजा जांच पूरी होने तक ये खाते फ्रीज रहेंगे। आरोपियों के खातों का दोबारा शुरू होना संभव नहीं हो पाएगा। पुलिस ने इन तथ्यों को सुबूत के तौर पर जांच में शामिल किया है।
चोरी के मामले में टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्रा गिरफ्तार कर जेल भेजे गए थे। एसआईटी की ही जांच में खुलासा हुआ था कि इन सभी के खातों में हैसियत से अधिक ट्रांजेक्शन पाए गए हैं। जिसको अमर उजाला ने प्रकाशित भी किया था। पुलिस ने इसको अपनी विवेचना में शामिल कर लिया है। सूत्रों के मुताबिक इन सभी आरोपियों व उनके परिवार वालों के खाते फ्रीज कराया है। इन खातों से कब, कितनी रकम जमा हुई और कहां खर्च की गई, ये सब जांचा जा रहा है।
आशंका...करीबियों के खातों में भी जमा की रकम
पुलिस सूत्रों के मुताबिक आरोपियों ने चोरी की रकम का कुछ हिस्सा अपने दोस्तों व परिचितों के खातों में भी जमा की। इसलिए ये सभी खाताधारक भी रडार पर हैं। उनकी भूमिका की जांच की जा रही है। अंदेशा है कि उनकी भी कहीं न कहीं मिलीभगत रही। अगर ये बात साबित हो जाएगी तो ये सभी भी आरोपी बनाए जा सकते हैं।
खातों में भी हेरफेर
कुछ आरोपी अपने परिजनों के खातों को ऑपरेट कर रहे थे। घर वालों को पता ही नहीं था कि उनके खातों का इस्तेमाल चोरी की रकम का हेरफेर करने में किया जाता था। सूत्रों के मुताबिक अविनाश शुक्ला के भाई अभिषेक को इसकी जानकारी थी। इसलिए वह जांच के दायरे में है। उस पर शिकंजा कस सकता है।