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राम मंदिर चंदा चोरी: अब शुरू हुआ असली जिम्मेदार लोगों को बचाने का खेल, अब तक जांच में हो रही है लीपापोती

Wed, 17 Jun 2026 06:22 AM IST
रोहित मिश्र सूरज शुक्ला, अमर उजाला लखनऊ

सार

Scam in Ayodhya Trustराम मंदिर चंदा चोरी के मामले अब असली जिम्मेदार लोगों को बचाने का खेल शुरू हो गया है। ट्रस्ट के बड़े नाम उजागर होते दिख रहे हैं। 
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राम मंदिर दान में गबन। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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 श्रीराम मंदिर की दान राशि और चढ़ावे में गबन के मामले में अब तक जो तथ्य सामने आए हैं, उनमें ट्रस्ट के कुछ बड़े लोगों और उनके शागिर्दों की भूमिका उजागर होती दिख रही है। ऐसे में उन पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन हकीकत में इन असल जिम्मेदारों को बचाने का खेल चल रहा है। यही वजह है कि केस दर्ज नहीं कराया गया और एसआईटी गठित कर दी गई। सिर्फ छोटी कर्मचारियों पर ठीकरा फोड़ने की तैयारी चल रही है।

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मंदिर की दान राशि और चढ़ावे को व्यवस्थित करना सुरक्षा व्यवस्था की तरह सबसे अहम कार्य होता है। मंदिर में करीब 36 मुख्य दानपात्र लगे हैं। रोजाना कुछ श्रद्धालु गुप्त दान में सोना-चांदी भी देते हैं। इसलिए इसमें ट्रस्ट के पदाधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई थी। सीसीटीवी से लैस कमरा भी था, जिससे कोई गड़बड़ी न हो सके। इसके बावजूद करोड़ों रुपये पार कर दिए गए। सोना-चांदी भी चोरों ने ठिकाने लगा दिया।

व्यवस्था में चंपत राय और ट्रस्ट के दो-तीन पदाधिकारियों के अलावा टिन्नू की भी भूमिका रहती थी। दान राशि की गिनती करवाने से लेकर उसे जमा कराने की पूरी प्रक्रिया में ये सभी शामिल रहते थे। इसके बावजूद करोड़ों रुपये का खेल हो गया। यही वजह है कि ये सभी सवालों के घेरे में हैं। जिनकी जिम्मेदारी दान राशि की निगरानी करना है, असल में इस गबन के जिम्मेदार भी वही हैं।

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शुरू से बनाया जा रहा नैरेटिव

जब चोरी कांड का खुलासा हुआ, तभी से एक नैरेटिव बनाया जा रहा है कि इसमें सिर्फ कर्मचारियों की भूमिका है। उनके घरों से रकम बरामद हुई है। यह इसलिए किया जा रहा है, जिससे ठीकरा इन्हीं कर्मचारियों पर फोड़ा जा सके। इतनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था को भेदना इन कर्मचारियों की क्षमता से परे लगता है। अंदेशा है कि रकम को बाकायदा मंदिर परिसर से बाहर निकाला जाता था, जिससे उनकी कोई जामा-तलाशी न हो सके। यही वजह है कि आसानी से रकम पार होती रही।

क्या वे अपनी ही खामी एसआईटी को बताएंगे?

एसआईटी ने जांच शुरू कर दी है। जांच में तमाम दान संबंधी रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज आदि ट्रस्ट ही उसे उपलब्ध करा रहा है। इसके आधार पर एसआईटी जांच करेगी। अब सवाल उठता है कि जब ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर ही सवाल व आरोप लग रहे हैं तो क्या यह संभव है कि वे ऐसे साक्ष्य देंगे, जिनसे वे खुद फंस जाएं? यह संभव नहीं लगता। अगर इन पदाधिकारियों के दिए साक्ष्यों के आधार पर जांच पूरी होगी तो बड़े जिम्मेदार मौज करेंगे और सिर्फ दिखाने के लिए छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर दी जाएगी।
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अगर सही से जांच हो तो नपेंगे कई बड़े लोग

मामले में यदि केस दर्ज कर निष्पक्ष जांच हो तो कई बड़े लोग नप सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि एसआईटी अपने स्तर से मामले की तह तक जाए। केस दर्ज कराए और विवेचना के दौरान पुख्ता साक्ष्य जुटाए। अब देखना होगा कि एसआईटी जांच को कहां तक ले जाती है। क्या बड़े लोग बचेंगे या वे भी जांच के दायरे में आएंगे। इसकी संभावना कम है। आखिर में कहा जाएगा कि जांच एसआईटी से कराई गई, जो शामिल थे उन पर कार्रवाई की गई। इससे बड़े बच भी जाएंगे और मामला भी रफादफा हो जाएगा।
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