लोकायुक्त के चयन में इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की भूमिका समाप्त किए जाने संबंधी विधेयक को भी राज्यपाल राम नाईक ने राष्ट्रपति के पास विचारार्थ भेज दिया है। इसके साथ ही अब राजभवन में सिर्फ उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग (संशोधन) विधेयक, 2015 ही लंबित रह गया है।
हालांकि विधेयक को राष्ट्रपति के पास भेजे जाने की जानकारी देने के लिए सीएम को लिखे पत्र में राज्यपाल ने कड़ी टिप्पणी भी की है।
राज्यपाल ने उत्तर प्रदेश लोक आयुक्त तथा उप लोक आयुक्त (संशोधन) विधेयक 2015 के परीक्षण के बाद कहा है कि राज्य विधान मंडल से पारित संशोधित विधेयक में लोकायुक्त के चयन की प्रक्रिया में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की भूमिका को समाप्त कर दिया गया है, जबकि केंद्रीय अधिनियम में लोकपाल के चयन में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की भूमिका महत्वपूर्ण है।
लोकायुक्त के चयन में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की भूमिका समाप्त करना केंद्रीय अधिनियम ‘लोकपाल तथा लोक आयुक्त अधिनियम 2013’ की धारा-4 की उपधारा (1) के विरोधाभासी प्रतीत होता है।