राज्यपाल राम नाईक ने विधान परिषद में नामित करने के लिए भेजी गई सूची के पांच नामों को खारिज कर दिया है। उन्होंने यह कहते हुए राज्य सरकार को फाइल लौटा दी है कि आपराधिक छवि के लोगों को उच्च सदन में नामित नहीं किया जा सकता।
उन्होंने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को नए नामों की सिफारिश के साथ जल्द फाइल भेजने को कहा है। इन नामों पर आपत्ति के चलते राज्य सरकार ने भी राजभवन से फाइल वापस करने का अनुरोध किया था।
गौरतलब है कि पिछले साल मई में राज्य सरकार ने विधान परिषद में मनोनयन कोटे की खाली होने वाली सीटों पर नामित करने के लिए नौ नामों की सूची राज्यपाल को भेजी थी। परीक्षण के बाद राज्यपाल ने 2 जुलाई 2015 को एसआरएस यादव, लीलावती कुशवाहा, रामवृक्ष सिंह यादव तथा जितेंद्र यादव को विधान परिषद में नामित करने की मंजूरी दे दी।
वहीं, कमलेश कुमार पाठक, संजय सेठ, रणविजय सिंह, अब्दुल सरफराज खां तथा डॉ. राजपाल कश्यप के नामों पर आपत्ति जताते हुए फाइल रोक ली थी।
राज्य सरकार को वापस लौटाई फाइल, कहा- जल्दी नाम दो
राज्यपाल ने इन पांच लोगों के आपराधिक इतिहास और क्षेत्र विशेष में विशेषज्ञता के बारे में विस्तृत जानकारी भी मांगी थी। सरकार राज्यपाल को संतुष्ट नहीं कर पाई कि ये पांचों उच्च सदन में नामित किए जाने की पूरी योग्यता रखते हैं।
राज्यपाल ने सोमवार को इन पांच नामों की फाइल राज्य सरकार को वापस भेजते हुए उम्मीद जताई है कि नए नामों की सिफारिश के साथ फाइल उन्हें जल्द भेजी जाएगी।
राज्यपाल ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि उनके और मुख्यमंत्री के बीच हुई कई दौर की बैठकों में इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी और मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया था कि वह नए नामों का प्रस्ताव भेजेंगे किंतु अभी तक यह राजभवन को नहीं मिला है।
राज्यपाल ने कहा है कि इन पांचों में से कई लोगों के खिलाफ अपराधिक मामले थे तथा वे संविधान के अनुच्छेद 171 (5) के अंतर्गत साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारी आंदोलन तथा समाज सेवा में से किसी भी क्षेत्र में विशेष ज्ञान अथवा व्यावहारिक अनुभव नहीं रखते हैं। ऐसे में उन्हें विधान परिषद का सदस्य नामित नहीं किया जा सकता।
इन वजहों से खारिज किए नाम
कमलेश पाठक ने अपने हलफनामे में दो-तीन आपराधिक मामलों की ही जानकारी दी थी, जबकि राजभवन को सूचना मिली है कि उनके ऊपर कुल 19 मामले दर्ज हैं।
संजय सेठ के बारे में भी राजभवन को बहुत सी शिकायतें मिली थीं। उन पर आर्थिक अपराध और घोटाले के आरोप हैं। संजय के ठिकानों पर पड़े आयकर छापों का भी राजभवन ने संज्ञान लिया है।
अब्दुल सरफराज खां द्वारा भी हलफनामे में अहम जानकारियां छिपाने की शिकायत राज्यपाल से की गई थी। राजभवन को शिकायत मिली थी कि वे एयरपोर्ट पर पिस्तौल लेकर जाने के मामले में पकड़े जा चुके हैं। इसके अलावा ट्रेन में सांसद के रिजर्वेशन पर यात्रा करने पर पकड़े जाने पर पांच दिन जेल में रहने की सूचना भी मिली थी। राजभवन ने सरकार से इस पर रिपोर्ट तलब की थी।
राजभवन के सूत्रों का कहना है कि किसी ने भी हलफनामे में यह नहीं बताया था कि उनका व्यवसाय क्या है?
राजभवन की एक आपत्ति यह भी है कि मनोनयन के लिए जो नाम भेजे गए हैं, वे सभी सहकारिता आंदोलन व समाजसेवा क्षेत्र से ही हैं। राजभवन ने सरकार से जानना चाहा था कि इतने बड़े प्रदेश में क्या साहित्य, कला व विज्ञान में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले लोग नहीं हैं?