फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राम मंदिर: रोज चोरी होते थे आठ लाख, फरवरी में ही पता चला गया था, कार्रवाई के बजाय सुभाष बोले- प्रभु देख रहें

Sat, 04 Jul 2026 08:02 AM IST
Akash Dwivedi डिजिटल डेस्क, लखनऊ

सार

राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जांच में सामने आया कि बैंक खातों में जमा दानराशि घटना के बाद उल्लेखनीय रूप से बढ़ी, जिससे पूर्व में अनियमितता की आशंका गहराई। जांच में यह भी सामने आया कि कथित गड़बड़ी की जानकारी पहले मिल चुकी थी, लेकिन समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
विज्ञापन
राम मंदिर चढ़ावा चोरी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राम जन्मभूमि मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच के बीच एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, चोरी का मामला उजागर होने से पहले प्रतिदिन राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के बैंक खातों में औसतन 16 से 18 लाख रुपये दान के रूप में जमा हो रहे थे।  वहीं, प्रकरण सामने आने के बाद यही राशि बढ़कर 24 से 26 लाख रुपये प्रतिदिन तक पहुंच गई है। इसी आधार पर आशंका जताई जा रही है कि पहले प्रतिदिन करीब 6 से 8 लाख रुपये की दानराशि में अनियमितता हो रही थी।

विज्ञापन


एसआईटी ने इस पहलू को भी अपनी जांच का हिस्सा बनाया है। हालांकि, चढ़ावा चोरी की घटना सामने आने के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई है। राम जन्मभूमि मंदिर के सिंह द्वार स्थित यात्री सहायता केंद्र के दान काउंटरों पर श्रद्धालु पहले की तरह ही नकद और यूपीआई के माध्यम से दान कर रहे हैं।

 ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों के अनुसार, केवल एक दान काउंटर से प्रतिदिन 60 हजार से एक लाख रुपये तक दान प्राप्त होता है। अवकाश और विशेष अवसरों पर यही राशि बढ़कर दो लाख रुपये तक पहुंच जाती है। मंदिर परिसर में ऐसे करीब 10 दान काउंटर संचालित हैं, जहां सुबह सात बजे से रात नौ बजे तक दान स्वीकार किया जाता है।
विज्ञापन


सूत्रों का कहना है कि बैंक में जमा होने वाली राशि में अचानक आई वृद्धि ने जांच एजेंसियों का ध्यान खींचा है। एसआईटी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि पहले और अब जमा हो रही राशि में इतना अंतर क्यों है और कहीं यह अंतर दानराशि के कथित गबन या चोरी से तो जुड़ा नहीं है। 

राम जन्मभूमि मंदिर में प्राप्त दानराशि एसबीआई और पंजाब नेशनल बैंक के खातों में जमा की जाती है। जांच एजेंसियां बैंक रिकॉर्ड, दान काउंटरों के हिसाब-किताब और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ के आधार पर पूरे मामले की पड़ताल कर रही है।

 

चोरी की पहले मिली थी भनक, फिर भी नहीं चेता सिस्टम

राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे व्यवस्था की गंभीर खामियां भी सामने आ रही हैं। सूत्रों के अनुसार, करोड़ों रुपये के चढ़ावे में गड़बड़ी की पहली जानकारी फरवरी में ही सुभाष चंद्र श्रीवास्तव तक आई थी। इसके बावजूद मामला नजरअंदाज कर दिया गया। अब यही चूक अहम जांच बिंदु बन गई है।

सूत्रों के मुताबिक, कैश काउंटिंग टीम के एक सदस्य ने इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव को बताया था कि गिनती के दौरान पैसे चोरी किए जा रहे हैं। आरोप है कि शिकायत पर तत्काल कार्रवाई करने के बजाय उन्होंने कहा, प्रभु देख ही रहे हैं, कौन सा हमारे-आपके घर से जा रहा है। इसके बाद भी व्यवस्था में कोई ठोस बदलाव नहीं हुआ और चोरी का सिलसिला जारी रहा। 

 

विज्ञापन

मनीष और रमाशंकर की हुई थी तैनाती

सूत्र बताते हैं कि महाकुंभ के बाद श्रद्धालुओं की संख्या और चढ़ावे में भारी बढ़ोतरी होने पर मार्च 2025 में कैश काउंटिंग के लिए 10 नए कर्मचारियों की भर्ती की गई। काम का दबाव बढ़ने पर मुख्य पीएफसी भवन और पुलिस चौकी में दो अलग-अलग काउंटिंग सेंटर बनाए गए। पुलिस चौकी स्थित केंद्र पर अनुकल्प, अविनाश, करुणेश और लवकुश मिश्रा की ड्यूटी लगाई गई थी। बाद में कुछ कर्मचारियों के हटने पर मनीष यादव और रमाशंकर को वहां तैनात किया गया।

सीसीटीवी और मॉनिटर के बावजूद कमजोर थी निगरानी

सूत्रों के अनुसार, मुख्य पीएफसी भवन के मॉनिटरिंग रूम में ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी अक्सर अपनी सीट से बाहर रहते थे। दूसरी ओर पुलिस चौकी स्थित काउंटिंग कक्ष में सीसीटीवी और मॉनिटर लगे होने के बावजूद निगरानी बेहद कमजोर रही। इसी लापरवाही ने चोरी के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें