चोरी की पहले मिली थी भनक, फिर भी नहीं चेता सिस्टम
राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे व्यवस्था की गंभीर खामियां भी सामने आ रही हैं। सूत्रों के अनुसार, करोड़ों रुपये के चढ़ावे में गड़बड़ी की पहली जानकारी फरवरी में ही सुभाष चंद्र श्रीवास्तव तक आई थी। इसके बावजूद मामला नजरअंदाज कर दिया गया। अब यही चूक अहम जांच बिंदु बन गई है।
सूत्रों के मुताबिक, कैश काउंटिंग टीम के एक सदस्य ने इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव को बताया था कि गिनती के दौरान पैसे चोरी किए जा रहे हैं। आरोप है कि शिकायत पर तत्काल कार्रवाई करने के बजाय उन्होंने कहा, प्रभु देख ही रहे हैं, कौन सा हमारे-आपके घर से जा रहा है। इसके बाद भी व्यवस्था में कोई ठोस बदलाव नहीं हुआ और चोरी का सिलसिला जारी रहा।
मनीष और रमाशंकर की हुई थी तैनाती
सूत्र बताते हैं कि महाकुंभ के बाद श्रद्धालुओं की संख्या और चढ़ावे में भारी बढ़ोतरी होने पर मार्च 2025 में कैश काउंटिंग के लिए 10 नए कर्मचारियों की भर्ती की गई। काम का दबाव बढ़ने पर मुख्य पीएफसी भवन और पुलिस चौकी में दो अलग-अलग काउंटिंग सेंटर बनाए गए। पुलिस चौकी स्थित केंद्र पर अनुकल्प, अविनाश, करुणेश और लवकुश मिश्रा की ड्यूटी लगाई गई थी। बाद में कुछ कर्मचारियों के हटने पर मनीष यादव और रमाशंकर को वहां तैनात किया गया।
सीसीटीवी और मॉनिटर के बावजूद कमजोर थी निगरानी
सूत्रों के अनुसार, मुख्य पीएफसी भवन के मॉनिटरिंग रूम में ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी अक्सर अपनी सीट से बाहर रहते थे। दूसरी ओर पुलिस चौकी स्थित काउंटिंग कक्ष में सीसीटीवी और मॉनिटर लगे होने के बावजूद निगरानी बेहद कमजोर रही। इसी लापरवाही ने चोरी के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया।