मुलायम सिंह यादव के इस्तीफे से खाली हुई मैनपुरी सीट पर सपा कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती है।
इस सीट पर होने वाले उपचुनाव में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव को मैदान में उतार सकती है। पार्टी नेतृत्व इसे लेकर काफी गंभीर है।
मैनपुरी सीट सपा का परंपरागत गढ़ है। शिवपाल सिंह यादव का जसवंतनगर विधानसभा क्षेत्र भी इसी सीट में आता है। इस सीट से मुलायम सिंह बड़े अंतर से जीत दर्ज कराते रहे हैं।
इनके नाम पर भी हुआ विचार
इस बार मुलायम सिंह मैनपुरी के साथ ही आजमगढ़ से भी चुनाव जीते। हालांकि मैनपुरी में उनकी बड़ी जीत हुई और आजमगढ़ में हल्की लेकिन सियासी मजबूरियों के चलते उन्हें मैनपुरी सीट छोड़नी पड़ी।
भले ही नेताजी ने मैनपुरी सीट छोड़ दी हो लेकिन सपा नेतृत्व इस क्षेत्र से अपने जुड़ाव और लगाव को कम नहीं करना चाहता।
इस सीट पर उपचुनाव के लिए अभी तक तेज प्रताप सिंह उर्फ तेजू यादव को चुनाव लड़ाने की चर्चा थी। तेजू, मुलायम सिंह के दिवंगत बड़े भाई के पौत्र हैं। वह सैफई के ब्लॉक प्रमुख भी हैं।
पार्टी नेतृत्व को लगता है कि तेजू का कद अभी मुलायम सिंह यादव के इस्तीफे से रिक्त हुई सीट को भरने का नहीं है। इसीलिए रामगोपाल यादव को चुनाव लड़ाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
मुलायम के बाद सबसे महत्वपूर्ण
रामगोपाल यादव फिलहाल राज्यसभा में सपा के नेता हैं। उनका कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है।
सपा उन्हें आसानी से राज्यसभा में भेज सकती है, लेकिन उन्हें लोकसभा उपचुनाव लड़ाना ज्यादा मुफीद लग रहा है।
राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में देखें तो रामगोपाल को सपा में मुलायम सिंह के बाद सर्वाधिक महत्व दिया जाता है।
वह 14वीं लोकसभा में संभल से सांसद चुने गए थे। उन्हें चुनाव लड़ाने से सपा को मैनपुरी में कद्दावर प्रत्याशी मिल जाएगा।
सबकुछ नेताजी के टिकट पर निर्भर
राम गोपाल को टिकट देने से जनता में यह संदेश भी जाएगा कि सपा मुखिया ने मैनपुरी को उपेक्षित नहीं छोड़ा है।
वहीं यह भी संदेश जाएगा कि मुलायम सिंह ने मैनपुरी सीट परिवार की तीसरी पीढ़ी को राजनीति में स्थापित करने के लिए खाली नहीं की है।
रामगोपाल को प्रत्याशी बनाए जाने के फैसले पर सपा नेता सीधे तौर पर कुछ नहीं बोल रहे। उनका कहना है कि नेताजी जिसे टिकट देंगे, वहीं सांसद चुना जाएगा।