सरकार, पार्टी और परिवार में चल रहे संग्राम में राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने राज्यसभा सदस्य अमरसिंह को सारे फसाद की जड़ करार देते हुए कहा कि ये बाहरी शख्स सपा को बरबाद करने पर आमादा है। उसे पार्टी से कोई लगाव नहीं है।
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खुद के काम हो जाएं, भले पार्टी भाड़ में जाए। खुद को मुलायमवादी कहने वाले अमरसिंह पर रामगोपाल ने सवाल किया. ‘जो समाजवादी नहीं, वह कैसा मुलायमवादी?’
अखिलेश को हटाना गलत, इस्तीफा लेना चाहिए था
पूरे मामले में गलतियां जरूर हुईं। नेताजी ने काफी गुस्से में अखिलेश से बात की, जो ठीक नहीं था। असल में, जहां से बात शुरू होती है, गलती की जिम्मेदारी तो वहां डालनी चाहिए। लेकिन मेरी इतनी हैसियत नहीं कि मैं कहूं कि नेताजी ने गलती की। लेकिन अखिलेश को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाना गलत था। नेताजी को उनसे इस्तीफा मांगना चाहिए था।
मुलायम की सरलता का लाभ उठा रहे हैं अमर सिंह
रामगोपाल ने सीधे अमर सिंह पर हमला करते हुए कहा कि अमर सिंह मुलायम सिंह की सरलता का लाभ उठाकर पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्हें सपा से कोई लेना-देना नहीं है। उनके लिए पार्टी जाए भाड़ में बस उनका काम चलता रहे। उन्होंने ही अखिलेश यादव को अध्यक्ष पद से हटवाया है। इसी की प्रतिक्रिया में मुख्यमंत्री ने शिवपाल सिंह के विभाग बदल दिए।
उन्होंने कहा कि अखिलेश के मन में शिवपाल के प्रति कोई नाराजगी नहीं है। वह उनका सम्मान करते हैं। दावा किया कि मुलायम सिंह का फैसला सभी मानेंगे और दो दिन में पार्टी में सब कुछ ठीक हो जाएगा। राजधानी आए रामगोपाल ने कई मुद्दों पर मीडियाकर्मियों से खुलकर बात की।
रामगोपाल का कहना है कि अखिलेश यादव ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की प्रतिक्रिया में शिवपाल के विभाग बदले। यह उनका तात्कालिक रिएक्शन था, भले ही बाद में पछतावा क्यों न हो। अखिलेश को अध्यक्ष पद से हटाने के बजाय उनसे इस्तीफा लेना चाहिए था।
नेताजी ने कहा, शिवपाल को अध्यक्ष बनाने का आदेश जारी करो
रामगोपाल ने बताया कि नेताजी ने मुझे फोन करके अखिलेश की जगह शिवपाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाने का तत्काल आदेश जारी करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा, सीएम ने बदले की भावना से शिवपाल के विभाग नहीं बदले, यह बस एक एक्शन का रिएक्शन था। अखिलेश के मन में शिवपाल के प्रति सम्मान है। सरकार बनने पर उन्हें सबसे महत्वपूर्ण विभाग दिए गए। सरकार का लगभग आधा बजट उन्हीं के महकमों में जाता है। सीएम को उनसे न पहले शिकायत थी और न ही आज शिकायत है।
अमर अखिलेश को बर्बाद करने की बात कह चुके हैं
रामगोपाल ने कहा कि नेताजी बहुत सरल हैं। उन्होंने जमीन से उठकर पार्टी को मजबूत किया है। जिंदगी में अहम फैसले किए हैं। जो पार्टी और नेताजी को गाली देते हैं उन्होंने भी उनकी सरलता का लाभ उठाया है। कुछ ताकते हैं जो मतभेद कराना चाहती हैं। क्या इशारा अमर सिंह की तरफ है?
इस पर रामगोपाल ने कहा कि पार्टी के आम कार्यकर्ता और नेताजी की यही धारणा है। वह तमाम लोगों की अनिच्छा के बावजूद पार्टी में आए राज्यसभा में भेजे गए। उनके मन में पार्टी के प्रति मोह नहीं है। उन्होंने ही अखिलेश को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटवाया है। वे अखिलेश को बर्बाद तक करने की बात कह चुके हैं। यदि यह कोई साजिश है तो बेनकाब होगी।
सीएम सहज, नहीं दिखा नाराजगी का भाव
रामगोपाल यादव
- फोटो : amar ujala
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात पर रामगोपाल ने कहा कि वह पूरी तरह सहज थे। उन्होंने क्या-क्या नहीं सुना, लेकिन साढ़े चार साल में वे कभी असहज नहीं दिखे। उनसे जो बातचीत हुई है, उसे साझा नहीं करूंगा लेकिन उनमें नाराजगी का कोई भाव नहीं है। एक्शन व रिएक्शन तत्कालिक था। यदि एक-दो दिन बीत जाता तो कुछ न होता।
अखिलेश पार्टी का चेहरा
रामगोपाल ने कहा कि शिवपाल को संगठन का लंबा अनुभव है। इसे सीएम को स्वीकार करना चाहिए, उन्हें स्वीकार भी है। जहां तक अखिलेश का सवाल है, वह मुख्यमंत्री हैं। पार्टी उनके चेहरे पर चुनाव लड़ेगी। वे पार्टी के निर्विवाद नेता हैं। पार्टी के कार्यकर्ता और नेता इसे स्वीकार करते हैं।
गायत्री प्रजापति व राजकिशोर को हटाने पर मुलायम सिंह राय न लिए जाने के सवाल पर रामगोपाल ने कहा, ऐसी बात नहीं है। दोनों मंत्रियों को हटाने का फैसला नेताजी की राय के बाद हुआ हैं। मुख्यसचिव क्यों बनाए गए, क्यों हटाए गए, इसकी हमें जानकारी नहीं है। इस बारे में मुख्यमंत्री और नेताजी को पता होगा। क्या शिवपाल के विभागों और मंत्रियों की वापसी होगी?
इस सवाल पर रामगोपाल ने कहा कि मेरी अखिलेश यादव से इस मुद्दे पर कोई बात नहीं हुई है। जो भी तय होगा अखिलेश और मुलायम सिंह की बातचीत में ही फैसला होगा। नेताजी जो कहेंगे सबकों स्वीकार होगा। उन्होंने कहा, सीएम अपने विवेक से काम करते हैं। उनसे दबाव से काम नेताजी के अलावा कोई नहीं करा सकता।
मैं सीएम होता तो राजकिशोर को न हटाता
गायत्री प्रजापति के दिल्ली में मुलायम सिंह से मिलने पर कहा कि इसे बुराई क्या है? हम आदमी अपनी बात रखता है। उन्हें भी बात रखने का अधिकार है। राजकिशोर के विभाग में कुछ फाइलें फाड़े जाने से जुड़े सवाल पर कहा कि वह क्यों फाइलें फड़वाएंगे? राजकिशोर ने कोई गलत काम नहीं किया। मैं सीएम होता तो राजकिशोर को मंत्रिपरिषद से निकालता।
कबीरा खड़ा बाजार में ...
रामगोपाल ने कहा, नेताजी आ रहे हैं। वैसे तो विवाद नहीं है, लेकिन जो भी है, नेताजी एक-दो दिन में खत्म कर देंगे। सर्वमान्य और अंतिम फैसला उन्हीं का है। उनके आदेश में तर्क-वितर्क नहीं होता। हमारा यहां क्या काम, मैं कल सवेरे 6 बजे दिल्ली चला जाऊंगा। यह कहने के बाद उन्होंने कबीरदास का दोहा पढ़ा- ‘कबीरा खड़ा बाजार में मांगे सबकी खैर, न काहू से दोस्ती न काहू से बैर’।