याचिका पर आयोग ने पावर कॉर्पोरेशन से रिपोर्ट तलब की थी। इसे लेकर आयोग में कई बार सुनवाई भी हुई। बाद में नियामक आयोग के अध्यक्ष आरपी सिंह ने इस मामले में आयोग के विशेषज्ञों से डिस्कशन पेपर तैयार कराया।
इसमें खुलासा हुआ कि उदय स्कीम लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को रेगुलेटरी एसेट का जो फायदा मिलना था, वह नहीं दिया गया। वर्ष 2000 से 2016-17 तक के ऑडिट आंकड़े के परीक्षण के बाद पता चला कि बिजली कंपनियों को उपभोक्ताओं को 11,851 करोड़ का फायदा देना है।
विद्युत नियामक आयोग ने अपनी वेबसाइट पर डिस्कशन पेपर अपलोड करके सभी पक्षों से 15 दिन के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। आपत्तियां व सुझाव मिलने के बाद आयोग इस पर अंतिम फैसला करेगा।
अब दरें बढ़वाना होगा मुश्किल : उपभोक्ता परिषद
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग की पहल का स्वागत करते हुए कहा है कि बिजली कंपनियों के लिए अब दरें बढ़वाना मुश्किल होगा। यही नहीं, आने वाले समय में रेगुलेटरी सरचार्ज का समाप्त होना तय है।