राजनाथ सिंह ने लखनऊ सभी आकलनों को ध्वस्त करते हुए लखनऊ के विकास का मास्टर प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी एक आईएएस अफसर को दी है।
शहर के विकास के लिए पूर्व आईएएस अफसर दिवाकर त्रिपाठी की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया है। 15 अगस्त तक यह कमेटी डवलपमेंट प्लान बना कर सांसद को सौंप देगी।
त्रिपाठी ने राजधानी के विकास को लेकर बहुत काम किया है। अटल बिहारी वाजपेयी जब देश के प्रधानमंत्री थे तब त्रिपाठी एलडीए उपाध्यक्ष हुआ करते थे।
उनके समय में कई विकास योजनाओं ने अमली जामा पहनाया था। राजनाथ सिंह के मीडिया प्रभारी नरेंद्र सिंह राणा ने बताया कि संसदीय क्षेत्र के समग्र विकास का खाका लखनऊ विकास प्राधिकरण के पूर्व उपाध्यक्ष दिवाकर त्रिपाठी बनाएंगे।
15 अगस्त को सौंपी जाएगी रिपोर्ट
15 अगस्त को यह रिपोर्ट राजनाथ सिंह को सौंप दी जाएगी। हालांकि त्रिपाठी ने बताया कि उनको अभी यह जानकारी सांसद के प्रतिनिधि की ओर से नहीं दी गई है।
फिर भी यह खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि, इस संबंध में वे अगले एक दो दिन में ही कुछ विस्तृत बता सकते हैं।
इन ड्रीम प्रोजेक्ट से जुड़े रहे त्रिपाठी
अटल बिहारी बाजपेई जब प्रधानमंत्री थे और प्रदेश में आवास एवं नगर विकास मंत्री के तौर पर लालजी टंडन थे, उस समय दिवाकर त्रिपाठी ने अनेक विकास योजनाओं को परवान चढ़ाया।
अटल के ड्रीम प्रोजेक्ट आश्रयहीन आवासीय योजना, चौक, सूरजकुंड पार्क के सुंदरीकरण, रैदास मंदिर फ्लाईओवर का निर्माण और यहां बसे लोगों के पुनर्वास और कुड़िया घाट सुंदरीकरण की परियोजनाओं में त्रिपाठी ने बड़ी कामयाबी हासिल की।
ऐसे होगा विकास
त्रिपाठी भले ही अभी अपनी योजनाओं का खुलासा न करें, मगर उनका रुख इस संबंध में बहुत स्पष्ट है। उनका सबसे ज्यादा ध्यान शहर की बेहतर कनेक्टिविटी और मलिन बस्तियों के विकास पर है।
वे मानते हैं कि प्रधानमंत्री स्वर्णिम चतुर्भुज योजना के तहत अमर शहीद पथ जैसी कुछ अन्य सड़कें शहर के विकास के लिए जरूरी हैं। गऊ घाट से गोमती बैराज तक जो पानी अभी तक जमा किया जाता है, उसके लिए स्टोरेज अब और बढ़ाए जाने की जरूरत है। इससे राजधानी के लोगों के लिए अधिक पानी उपलब्ध होगा।
एसटीपी, नई सीवरेज व्यवस्था और सड़कों की बेहतर किया जाए। अंडर पास और फ्लाई ओवरों की संख्या बढ़ाना भी वक्त के हिसाब से जरूरी हो गया है। जहां भी जरूरत हो, डबल डेकर सड़क होनी चाहिए। जबकि चौराहे जहां दो सड़क जुड़ती हैं, वहां भूमिगत मार्ग बनाए जाएं।
अनियोजित कॉलोनी में रहने वाले लोगों को जनसुविधाएं दिलवाने के लिए काम हों। बेटरमेंट चार्ज लेकर ऐसी कालोनियों में मूलभूत परेशानियों को दूर करने की व्यवस्था की जाए।