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मोदी नहीं, यहां से राजनाथ लड़ेंगे चुनाव!

Fri, 31 Jan 2014 12:28 PM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
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लखनऊ को लेकर काफी दिनों तक चर्चा गर्म रही कि यहां से नरेंद्र मोदी चुनाव लड़ सकते हैं। लेकिन, अब मोहरे बदल रहे हैं। सियासी गलियारों में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह के लखनऊ से लोकसभा चुनाव लड़ने की चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। सिंह गुरुवार शाम यहां पार्टी के पूर्व विधायक सुरेश तिवारी के यहां मांगलिक कार्यक्रम में भाग लेने आए थे।
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सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के रणनीतिकार राजधानी से किसी बड़े नेता को चुनाव लड़ाने के पक्ष में हैं। मौजूदा सांसद लालजी टंडन भी काफी वरिष्ठ हैं, पर पार्टी के कुछ नेता चाहते हैं कि टंडन को दूसरी महत्वपूर्ण भूमिका सौंपकर यहां से राजनाथ को लड़ाकर सूबे में यह संदेश दिया जाए कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सीट उसके लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

इसके पीछे क्षत्रिय वोटों की लामबंदी की कोशिश भी देखी जा रही है। उधर, राजनाथ सिंह के लखनऊ पहुंचने के साथ ही उन्हें टिकट के दावेदारों ने घेर लिया। ये दावेदार देर रात तक उनके आवास पर जमे रहे। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी सहित कई प्रमुख लोगों ने राजनाथ से मुलाकात की।
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फरवरी में जारी हो लिस्ट, पर टेंशन

भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश के प्रत्याशियों के नाम फरवरी में तय कर देने का फैसला किया है। इसके लिए प्रत्याशियों की सूची की समीक्षा और उसे अंतिम रूप देने का काम मेरठ में 2 फरवरी को होने वाली नरेंद्र मोदी की ‘विजय शंखनाद रैली’ के बाद शुरू कर दिया जाएगा।

अलबत्ता प्रत्याशियों की घोषणा पर पार्टी के भीतर असमंजस है। कुछ की राय है कि इनकी घोषणा फरवरी में ही कर दी जाए, जिससे टिकट वितरण को लेकर होने वाली नाराजगी या अन्य दिक्कतों से निपटने के लिए पार्टी के रणनीतिकारों के सामने पर्याप्त समय रहे। वहीं, कुछ का तर्क है कि लखनऊ में 2 मार्च को मोदी की महारैली के बाद नामों की घोषणा हो, जिससे टिकट न पाने वालों की नाराजगी का असर रैली में जुटने वाली भीड़ पर न पड़े।

छांट लिए गए आधे से ज्यादा नाम

सूत्रों का कहना है कि लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने आधी से ज्यादा सीटों पर उम्मीदवारों के नाम छांट लिए हैं। कई सीटों पर एक-एक तो कहीं-कहीं दो नाम ही बचे हैं।

हालांकि कुछ जगहों पर आने वाले दिनों में दूसरे दलों के किसी दमदार नेता के भाजपा में शामिल होने की संभावना को देखते हुए वहां विशेष स्थिति में नाम में परिवर्तन का भी विकल्प रखा गया है। जहां तक सूची का सवाल है तो भाजपा ने नाम तय करने को लेकर काफी कवायद पूरी कर ली है।

उम्मीद है कि इस पूरी प्रक्रिया में कल्याण सिंह की भी अहम भूमिका रहेगी।

दावेदारों की भरमार बनी मुसीबत

पार्टी के ज्यादातर नेता दावेदारों की भरमार के चलते उम्मीदवारों की घोषणा फरवरी में करने से बचने की कोशिश में हैं। दरअसल, कुछ सीटों पर तो 40-40 लोगों ने टिकट का दावा ठोक दिया है। रणनीतिकार आशंकित हैं कि इतनी बड़ी संख्या में दावेदारों के होने से उम्मीदवारों की घोषणा के बाद प्रदेश में बड़े पैमाने पर नाराजगी मुखर हो सकती है।

इससे मोदी की लखनऊ महारैली में जुटने वाली भीड़ पर असर पड़ सकता है। भाजपा की कोशिश है कि भीड़ के लिहाज से लखनऊ महारैली रिकॉर्ड बना दे। इसलिए इनकी कोशिश है कि महारैली के बाद ही टिकटों की घोषणा हो, जिससे डैमेज कंट्रोल के लिए पर्याप्त समय रहे।

दावा छोड़ देने की हो रही अपील

प्रदेश प्रभारी अमित शाह इन दिनों जिलों की बैठकों में जो कह रहे हैं, उससे भी दावेदारों की भरमार से पार्टी नेताओं की मुसीबत की बात साफ हो जाती है। जानकारी के मुताबिक, वे कहते हैं, ‘सोने के पहले ईमानदारी से सब लोग भगवान का स्मरण करिएगा। फिर बताइएगा कि जितने लोगों ने टिकट मांगे हैं, वे लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं।

पार्टी नहीं चाहती कि किसी कार्यकर्ता की दावेदारी खारिज करनी पड़े। इसलिए ऐसे लोग खुद अपना नाम वापस ले लें’। जाहिर है कि पार्टी की मंशा ज्यादा से ज्यादा दावेदारों को टिकट की होड़ से अलग करना है।

एक साथ सभी सीटों पर घोषणा

भाजपा के रणनीतिकार प्रदेश में लोकसभा की सभी 80 सीटों पर एक साथ उम्मीदवारों के नामों की घोषणा करना चाहते हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तरफ इन क्षेत्रों में सर्वेक्षण और फीडबैक जुटाने का काम अभी पूरा नहीं हो पाया है।

टिकट की घोषणा से पहले भाजपा नेताओं को संघ के साथ सूची पर विचार-विमर्श करना है। इसे देखते हुए भी उम्मीदवारों की घोषणा मोदी की लखनऊ रैली के बाद करने पर विचार हो रहा है।
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करना पड़ा ऐलान, तो ये नाम होंगे शामिल

किसी विशेष परिस्थिति में अगर पार्टी को उम्मीदवारों की घोषणा करनी ही पड़ी तो फरवरी के दूसरे से तीसरे सप्ताह के बीच एक सूची जारी कर दी जाएगी।

इसमें राजनाथ सिंह, मेनका गांधी, योगी आदित्यनाथ, डॉ. मुरली मनोहर जोशी, वरुण गांधी सहित ज्यादातर मौजूदा सांसद शामिल होंगे। इसके अलावा कुछ सीटें व चेहरे वे होंगे जहां बहुत ज्यादा खींचतान नहीं है।

मौजूदा सांसदों में कुछ नई सीटों से उतारे जा सकते हैं।
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